आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का महत्वपूर्ण फैसला: विक्रय पत्र निष्पादन के बाद अतिरिक्त राशि मांगना अनुचित, बिल्डर 45 दिन में दे फ्लैट का कब्जा

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने रियल एस्टेट क्षेत्र में मनमानी करने वाले बिल्डरों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फ्लैट के संपूर्ण मूल्य का भुगतान प्राप्त करने और स्थायी विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) निष्पादित होने के बाद बिल्डर द्वारा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त धनराशि की मांग करना अनुचित व्यापार संव्यवहार और सेवा में गंभीर कमी है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने आगरा के सिकन्दरा स्थित श्री बाला जी सहकारी आवास समिति लिमिटेड और बलदेव हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड (डायरेक्टर व सचिव श्री नाहर सिंह यादव) के विरुद्ध प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है।

मामले की पृष्ठभूमि और तथ्य:

आगरा के न्यू आगरा क्षेत्र निवासी परिवादिनी श्रीमती शिल्पी मिश्रा ने 05 सितम्बर 2020 को निष्पादित अनुबंध पत्र के माध्यम से ककरैठा स्थित अफोर्डेबल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में प्रथम तल पर फ्लैट संख्या 103 (क्षेत्रफल 116.69 वर्ग मीटर) 30,87,000/- रुपये में बुक कराया था।

इस राशि में कवर्ड पार्किंग शुल्क के 1,00,000/- रुपये और डेवलपमेंट चार्ज के 50,000/- रुपये भी शामिल थे।

अनुबंध के अनुसार 18 माह के भीतर पूर्ण निर्मित फ्लैट का कब्जा दिया जाना था।

परिवादिनी ने अनुबंध के अनुसार फ्लैट की संपूर्ण कीमत का भुगतान कर दिया, जिसके बाद 16 जुलाई 2021 को उप निबन्धक सदर प्रथम, आगरा के कार्यालय में विधिवत विक्रय पत्र निष्पादित किया गया।

इसके बावजूद प्रतिपक्षी बिल्डर द्वारा न तो समय पर निर्माण पूरा किया गया और न ही फ्लैट का कब्जा सौंपा गया। परिवादिनी द्वारा विधिक नोटिस भेजने पर बिल्डर ने 4,82,650/- रुपये की अतिरिक्त धनराशि की मांग करते हुए कब्जा देने से मना कर दिया।

आयोग की महत्वपूर्ण टिप्पणी:

पत्रावली और साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद आयोग ने माना कि कोई भी बिल्डर संपूर्ण भुगतान प्राप्त होने के बाद ही अंतिम रूप से विक्रय पत्र निष्पादित करता है।

विक्रय पत्र निष्पादित होने के बाद अतिरिक्त धनराशि की मांग करना पूरी तरह अनुचित है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिससे सिद्ध हो कि परिवादिनी पर कोई राशि बकाया है, अतः बिल्डर का आचरण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापार संव्यवहार और सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

आयोग द्वारा पारित आदेश के मुख्य बिंदु

* फ्लैट के कब्जे का निर्देश: प्रतिपक्षीगण को आदेशित किया गया है कि वे निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर फ्लैट संख्या 103 को मानकों के अनुसार पूर्ण रूप से निर्मित कर परिवादिनी को उसका कब्जा सुपुर्द करें।

* मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति: कब्जा देने में किए गए विलंब तथा मानसिक पीड़ा एवं आर्थिक क्षति के लिए 2,00,000/- रुपये (दो लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाए।

* ब्याज की अदायगी: दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि पर 05 मार्च 2022 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।

* वाद व्यय का भुगतान: कानूनी कार्रवाई के खर्च के रूप में 20,000/- रुपये (बीस हजार रुपये) आयोग के खाते में जमा कराए जाएं।

* धारा 72 के तहत कार्रवाई की चेतावनी: यदि प्रतिपक्षीगण 45 दिन के भीतर आदेश का पालन करने में चूक करते हैं, तो परिवादिनी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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विवेक कुमार जैन
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