आगरा।
विशेष न्यायाधीश माननीय विवेक कुमार की अदालत ने बिना लाइसेंस दवाओं के अवैध भंडारण और धोखाधड़ी के मामले में आरोपित दो दवा विक्रेताओं को दोषमुक्त करने का आदेश दिया है।
अदालत ने यह निर्णय औषधि निरीक्षक और पुलिस प्रशासन द्वारा जांच में बरती गई गंभीर लापरवाही और साक्ष्यों की कमी को देखते हुए लिया है।
मामला वर्ष 2009 का है, जब 22 अगस्त को औषधि निरीक्षकों की एक संयुक्त टीम ने पुलिस बल के साथ सुई कटरा स्थित चीफ मार्केट के एक बेसमेंट में छापा मारा था।
इस कार्रवाई के दौरान खटीक पाड़ा निवासी राजकुमार और चारसू दरवाजा निवासी योगेश पलवार के खिलाफ अवैध रूप से 21 बोरे दवाओं के भंडारण और सैंपल की दवाओं के व्यापार का आरोप लगाते हुए थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई खामियां सामने आईं। बरामदगी के समय दावा किया गया था कि कुल 21 बोरे दवा जब्त की गई है, लेकिन अदालत में केवल 15 बोरे ही पेश किए जा सके।
इन 15 बोरों में से भी 9 बोरों पर संबंधित अपराध संख्या तक अंकित नहीं थी। इसके अतिरिक्त, पूरी बरामदगी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया और यह कार्रवाई आरोपियों की अनुपस्थिति में की गई थी।
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा, विमु आहूजा और साजिद अहमद ने तर्क दिया कि जांच एजेंसी ने प्रक्रियात्मक नियमों का पालन नहीं किया और बरामद किए गए सामान की पहचान भी संदिग्ध है।
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों और पुलिस व औषधि विभाग की लापरवाही को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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1 thought on “साक्ष्यों के अभाव और लापरवाही के चलते दवा विक्रेता 13 वर्ष बाद दोषमुक्त”