आगरा।
विशेष न्यायाधीश डी.ए.ए./अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-06, आगरा माननीय नीरज कुमार महाजन ने चोरी के एक मामले में तीन अभियुक्त महिलाओं रचना, राधा और सोनिया उर्फ सोनी की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
न्यायालय ने मामले की केस डायरी और उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन करने के बाद पाया कि विवेचक (जांच अधिकारी) की संपूर्ण विवेचना मात्र अभियुक्तों के इकबालिया बयान पर आधारित है, जो कि विधि में मान्य नहीं है।
कोर्ट ने विवेचना को स्तरहीन (substandard) करार देते हुए पुलिस कमिश्नर, आगरा को इस आदेश की एक प्रति सूचनार्थ और विवेचनाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने हेतु भेजने का आदेश दिया है।

मामले का विवरण:
* अभियुक्तगण (प्रार्थीगण): रचना पत्नी मोनू (उम्र करीब 28 वर्ष), राधा पत्नी दारा सिंह (उम्र करीब 25 वर्ष), और सोनिया उर्फ सोनी पत्नी छोटू (उम्र करीब 25 वर्ष)। ये सभी ग्राम रूदी करन, आजाद नगर, थाना चिककसाना, जिला भरतपुर, राजस्थान की निवासी हैं।
* मुकदमा संख्या और धाराएँ: मु०अ०सं०-387/2025, धारा 305(2), 317(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS), थाना हरीपर्वत, जिला आगरा।
* घटना: अभियोजन कथानक के अनुसार, वादिया (जो स्वयं जनपद कन्नौज में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी हैं) ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया कि दिनांक 31/10/2025 को बिजली घर चौराहे से भगवान टॉकीज आते समय ऑटो में बैठी तीन अज्ञात महिलाओं ने (जिनके साथ लगभग 10-11 वर्ष की एक बच्ची भी थी) उनके गले से लगभग 15 ग्राम सोने की चेन काट ली।
* गिरफ्तारी और विरोध: अभियुक्त महिलाएं दिनांक 11.11.2025 से जिला कारागार, आगरा में निरुद्ध थीं। राज्य/विपक्षी की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए इसे गंभीर प्रकृति का मामला बताया गया था।
कोर्ट के मुख्य अवलोकन:
न्यायालय ने केस डायरी के अवलोकन के आधार पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं:
* प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) अज्ञात के विरुद्ध दर्ज की गई थी।
* विवेचक बरामदशुदा माल का वादिया का होना साबित नहीं कर सका।

* अभियुक्ताओं की शिनाख्त परेड (पहचान कार्यवाही) वादिया से कराए जाने संबंधी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
* अभियुक्ताओं से बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी (independent witness) नहीं है।
* विवेचक ने कथित तौर पर चोरी की गई चेन को बेचकर कुण्डल खरीदने की बात पर कोई विवेचना नहीं की।
* अभियुक्तों का कोई आपराधिक इतिहास दर्शित नहीं किया गया है।
जमानत की शर्तें:
कोर्ट ने गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है।
अभियुक्तगण को निम्नलिखित शर्तों पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है:
* प्रत्येक अभियुक्त ₹50,000/- (पचास हजार रुपये) के व्यक्तिगत बन्धपत्र (Personal Bond) तथा समान धनराशि के दो-दो नवीन प्रतिभूगण (Sureties) दाखिल करेंगे।
* अभियुक्तगण विचारण की कार्यवाही में सहयोग करेंगे और विचारण/साक्ष्य स्तर पर स्थगन नहीं लेंगे, और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे।
अभियुक्त गण की तरफ़ से पैरवी अधिवक्ता संदीप सिंह और रंजना शाक्य ने की ।
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