आगरा/प्रयागराज २८ अप्रैल ।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील/संशोधन/मूल याचिकाओं के निपटान को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, जहां मुकदमे पर रोक लगी हुई है, खासकर मकान मालिक-किराएदार विवादों के। न्यायालय ने हाईकोर्ट से ऐसे मामलों की सुनवाई करने को कहा, जहां मुकदमे पर रोक लगी हुई है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक मामले पर विचार करते हुए यह निर्देश दिया, जहां मकान मालिक ने बताया कि हाईकोर्ट के स्थगन के कारण, किराएदार के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही रुक गई है। इसलिए याचिकाकर्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की।
यह देखते हुए कि मुकदमे की कार्यवाही पर रोक से मामले के निष्कर्ष में देरी होगी, न्यायालय ने हाईकोर्ट को ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने का सामान्य निर्देश दिया।
न्यायालय ने टिप्पणी की,
“हालांकि, हम इस तथ्य से अवगत हैं कि हाईकोर्ट के समक्ष सैकड़ों याचिकाएं लंबित हो सकती हैं, फिर भी, हम यह टिप्पणी करने के लिए बाध्य हैं कि जहां हाईकोर्ट ने मामलों में, विशेष रूप से मकान मालिक और किरायेदार के बीच लंबित मामलों में सुनवाई पर रोक लगाई है, उन मामलों की शीघ्र सुनवाई की जानी चाहिए क्योंकि सुनवाई या मूल कार्यवाही पर रोक लगाने से अनिवार्य रूप से, सुनवाई और उसके बाद की पूरी कार्यवाही के समापन में देरी होगी। इन परिस्थितियों में, हम यह टिप्पणी करने के लिए बाध्य हैं कि हाईकोर्ट उपरोक्त टिप्पणियों पर ध्यान दे सकता है और उन मामलों का निपटान करने का प्रयास कर सकता है ।जहां हाईकोर्ट द्वारा मामलों की सुनवाई पर रोक लगाई गई है, उन मामलों की बारी-बारी से और यथासंभव शीघ्रता से और स्पष्ट रूप से कानून के अनुसार सुनवाई करके।”
न्यायालय ने निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखी जाए।
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साभार: लाइव लॉ
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