आगरा/नई दिल्ली: १२ अगस्त ।
आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने परिसर के भीतर एक सख्त कदम उठाया है। न्यायालय ने एक परिपत्र जारी कर बचे हुए भोजन के उचित निस्तारण को अनिवार्य कर दिया है ताकि आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोका जा सके और काटने की घटनाओं के खतरे को कम किया जा सके।
यह परिपत्र दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों को स्थायी रूप से शेल्टरों में भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद आया है।
परिपत्र में क्या है ?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी परिपत्र में यह बताया गया है कि हाल ही में कोर्ट के गलियारों और यहाँ तक कि लिफ्टों में भी आवारा कुत्तों की संख्या में “काफी” वृद्धि हुई है।
इस समस्या से निपटने के लिए, परिपत्र में निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:
* बचे हुए भोजन का उचित निस्तारण: परिसर में सभी बचे हुए भोजन को केवल पूरी तरह से ढंके हुए कूड़ेदानों में ही फेंकना होगा।
* खुले में भोजन फेंकने पर रोक: किसी भी परिस्थिति में खुले स्थानों या बिना ढंके बर्तनों में भोजन फेंकने की अनुमति नहीं होगी।
परिपत्र के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य जानवरों को भोजन की तलाश में परिसर में आने से रोकना, काटने की घटनाओं के जोखिम को कम करना और परिसर में स्वच्छता बनाए रखना है।
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दिल्ली-एनसीआर के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:
यह कदम जस्टिस जे.बी. पारडिवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के उस हालिया आदेश के बाद आया है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या को “बेहद गंभीर” बताया गया था।
11 अगस्त को, पीठ ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को “यथाशीघ्र” स्थायी रूप से हटाने और छह से आठ सप्ताह के भीतर लगभग 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस पुनर्वास अभियान में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शामिल हो सकती है।
इसके साथ ही, न्यायालय ने भविष्य में और अधिक कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह परिपत्र और हालिया आदेश दोनों ही सार्वजनिक स्थानों पर आवारा जानवरों की समस्या को गंभीरता से संबोधित करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट के प्रयासों को दर्शाते हैं।
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