अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी के कारण जमानत पर रिहा हुआ लूट का आरोपी आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय कक्ष संख्या-11 माननीय नीरज कुमार बक्शी आगरा की अदालत ने लूट करने के मामले में आवेदक/अभियुक्त आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी पुत्र नूर मोहम्मद को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है ।

जानिए सम्पूर्ण प्रकरण का विवरण:

* आवेदक/अभियुक्त: आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी (उम्र करीब 40 वर्ष)

* निवासी: पूजा कॉलोनी, पण्डितजी वाली गली नं0 12, 50 फुटा रोड, थाना लौनी, जिला गाजियाबाद, उ०प्र०

* मुकदमा संख्या: 456/2025, धारा-109(1), 3(5) बी०एन०एस०

* थाना: एत्मादपुर, आगरा

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अभियोजन पक्ष का कथानक:

अभियोजन के अनुसार, दिनांक 18/11/2025 को पुलिस टीम गश्त कर रही थी, तभी मुखबिर ने सूचना दी कि चार-पांच दिन पहले मथुरा से एक लड़के को कार में बैठाकर लूटने और फेंकने वाले चार व्यक्ति आज फिर उसी सफेद कार से एक्सप्रेसवे के नीचे नोएडा कट से मंगारा बाकी रोड पर खड़े हैं और किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।

पुलिस बल जब मौके पर पहुँचा, तो कार के बाहर खड़े तीन व्यक्ति भागने लगे और एक व्यक्ति (कार चालक) कार स्टार्ट करने लगा।

भागते हुए एक व्यक्ति चिल्लाया,

“समीर जल्दी गाडी स्टार्ट कर पुलिस आ गयी है”। इस पर कार चालक और दो अन्य व्यक्ति चिल्लाये “वसीम मार गोली पुलिस वालो को नहीं तो हम फंस जायेंगे”।

पुलिस ने कार चालक सहित तीन व्यक्तियों को दबोच लिया। भाग रहे चौथे व्यक्ति (वसीम) ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायर किया, जिस पर पुलिस को भी आत्मरक्षार्थ फायर करना पड़ा।

घायल अवस्था में पकड़े गए वसीम ने पूछताछ में बताया कि वह अपने साथी आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी (जिसके पास आई 204341 कार है) और अन्य साथियों के साथ मिलकर लिफ्ट देने के बहाने यात्रियों से लूटपाट करते हैं। पकड़े गए तीन व्यक्तियों में से एक ने अपना नाम आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी बताया।

अदालत में प्रस्तुत की गई दलीलें:

* आवेदक के अधिवक्ता संदीप सिंह और रंजना शाक्य ने तर्क दिए कि अभियुक्त निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है, और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई है। अभियुक्त 19.11.2025 से जिला कारागार में निरूद्ध है।

* विद्वान अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने विरोध किया कि आवेदक ने अपने सह-अभियुक्त के साथ मिलकर पुलिसकर्मियों पर तमंचे से फायर किया। अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए जमानत रद्द की जाए।

* अदालत ने पाया कि आवेदक/अभियुक्त पर पुलिसकर्मियों पर जान से मारने की नीयत से फायर करने और तमंचा, कारतूस बरामद होने का आरोप है। हालांकि, अभियोजन की ओर से प्रस्तुत आपराधिक इतिहास में कोई दोषसिद्धि दर्शित नहीं है। साथ ही, किसी भी पुलिस कर्मचारी को कोई चोट नहीं आई है।

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कोर्ट ने दिया जमानत का आदेश:

प्रकरण के समस्त तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए, अदालत ने आवेदक अभियुक्त आरिफ उर्फ समीर उर्फ पप्पी को निम्नलिखित शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है:

* आवेदक/अभियुक्त ₹75,000/- (पचहत्तर हज़ार रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की दो प्रतिभू, संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुरूप दाखिल करेगा।

* आवेदक/अभियुक्त उस अपराध जैसा कोई अन्य अपराध नहीं करेगा।

* वह किसी भी गवाह को धमकी या उत्प्रेरणा नहीं देगा, न ही साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ करेगा।

* वह विवेचना एवं विचारण की कार्यवाही में सहयोग करेगा।

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विवेक कुमार जैन
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