“अधिकृत मात्रा से भारी बरामदगी समाज के प्रति गंभीर अपराध” जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने रामपुर के अब्दुल कादिर और अहसान नूरी की अर्जी की नामंजूर।
आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नशीली दवाओं के अवैध व्यापार और तस्करी के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अब्दुल कादिर और अहसान नूरी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि अभियुक्तों के कब्जे से बरामद मादक द्रव्य (कोडीन) की मात्रा निर्धारित सीमा से बहुत अधिक है, जो इस अपराध को अत्यंत गंभीर श्रेणी में लाता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
केस की पृष्ठभूमि और बरामदगी:
मामला जनपद रामपुर के थाना कोतवाली से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 8 सितंबर 2025 को पुलिस ने एक बड़ी छापेमारी में 119 बॉक्स बरामद किए थे, जिनमें 11,885 बोतल कोडीन युक्त कफ सीरप भरी हुई थी।
*गिरफ्तारी: यह खेप सह-अभियुक्त अनीस के घर से एक कार में लोड की जा रही थी। पुलिस ने घेराबंदी कर अब्दुल कादिर को मौके से गिरफ्तार किया, जबकि कुछ अन्य आरोपी भागने में सफल रहे।
* संलिप्तता: मामले में सह-अभियुक्त अनीस की पत्नी गुलफिशा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। बरामद नमूनों को जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।

कोर्ट में पक्ष और विपक्ष की दलीलें:
याची पक्ष का तर्क:
याचियों की ओर से दलील दी गई कि अहसान नूरी ‘आजाद सर्जिकल एंड मेडिकल एजेंसी’ (स्वार, रामपुर) की प्रोप्राइटर हैं और उनके पास दवाओं की बिक्री का वैध लाइसेंस है।
उन्हें इस मामले में द्वेषपूर्ण तरीके से फंसाया गया है और उनके पास से कोई फर्जी दस्तावेज या आधार कार्ड बरामद नहीं हुआ है।
सरकार का विरोध:
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए प्रथम पारितोष मालवीय ने जमानत का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि:
* बरामदगी की मात्रा ‘कमर्शियल क्वांटिटी’ से कई गुना अधिक है।
* लाइसेंस की आड़ में प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी करना कानून का उल्लंघन है।
* अभियुक्तों को रंगे हाथों पकड़ा गया है, अतः उन्हें जमानत देना जांच और समाज के हित में नहीं है।
न्यायालय का निष्कर्ष:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों और बरामदगी की विशाल मात्रा को देखते हुए माना कि यह मामला प्रथम दृष्टया गंभीर मादक पदार्थ तस्करी का है।
कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस होने का अर्थ यह नहीं है कि भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं का अवैध परिवहन किया जाए।
इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी को अस्वीकार (Dismissed) कर दिया।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- बरेली हिंसा मामले में आरोपी नाजिम रज़ा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत - February 4, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से पूछे गंभीर विधिक प्रश्न,संपत्तियों को ध्वस्तीकरण से दी अंतरिम सुरक्षा - February 4, 2026
- 11885 बोतल कोडीन कफ सीरप की तस्करी के आरोपियों को राहत नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत - February 4, 2026








2 thoughts on “11885 बोतल कोडीन कफ सीरप की तस्करी के आरोपियों को राहत नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत”