आगरा।
उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद से एक फिल्मी पटकथा जैसा वास्तविक मामला सामने आया है, जहाँ 26 साल पुराने एक मुकदमे में खुद को मृत घोषित करवाकर कानूनी कार्यवाही बंद करवाने वाला मुख्य आरोपी न केवल जीवित मिला, बल्कि वह शहर की सड़कों पर स्कूटी दौड़ाते हुए भी पाया गया। पुलिस की ताजा जांच रिपोर्ट ने आरोपी के इस बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है।
जानिये क्या है पूरा मामला ?
मामला राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि वर्तमान परिवाद संख्या 1266/2012 से जुड़ा है, जो आगरा के थाना न्यू आगरा में मूल परिवाद संख्या 242/1999 के अंतर्गत धारा 467 और 468 (जालसाजी) के तहत चल रहा था।
इस मामले में आरोपी तारा चंद्र शर्मा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी थे। वर्ष 2013 में पुलिस ने अदालत में एक मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल कर रिपोर्ट दी कि आरोपी तारा चंद्र की मृत्यु 2 सितंबर 1998 को ही हो चुकी है। इस आधार पर अदालत ने 18 मार्च 2017 को उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त (Abate) कर दी थी।
डिजिटल सबूतों से खुला राज:
मृतक घोषित आरोपी के जीवित होने का खुलासा तब हुआ जब वादी राजकुमार वर्मा ने सक्रियता दिखाई।
वादी ने अदालत को साक्ष्य दिए कि:
* तारा चंद्र शर्मा ने वर्ष 2016 में अपने नाम से एक एक्टिवा स्कूटर (UP80DU8873) पंजीकृत कराया है।
* वर्ष 2019 में उस वाहन का चालान भी कटा था।
* आरोपी वर्तमान में सक्रिय मोबाइल नंबर और बैंक खातों का संचालन कर रहा है।
पुलिस आख्या ने की पुष्टि: ‘मुर्दा’ बोल रहा है:
न्यायालय विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (6), आगरा के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने जब जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
उप-निरीक्षक (S.I.) की रिपोर्ट के अनुसार:
* परिवहन विभाग (RTO) के रिकॉर्ड में आरोपी तारा चंद्र शर्मा ने जुलाई 2016 में वाहन खरीदा और अपना मतदाता पहचान पत्र लगाया।
* जब पुलिस उसके निवास (गांधी नगर) पहुंची, तो आरोपी का पुत्र आशुतोष शर्मा वहां मिला, जिसने पुष्टि की कि उसके पिता जीवित हैं।
* इतना ही नहीं, आरोपी तारा चंद्र शर्मा खुद पुलिस के सामने पेश हुआ और स्वीकार किया कि उसकी उम्र लगभग 70 वर्ष है। पुलिस ने आरोपी और उसके पुत्र की मौके पर फोटो भी खींची है।
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न्यायालय में पुनर्जीवित होगा मुकदमा:
वादी राजकुमार वर्मा ने अब अदालत से प्रार्थना की है कि 18 मार्च 2017 के उस आदेश को निरस्त (Set Aside) किया जाए जिसके तहत आरोपी को मृत मानकर फाइल बंद कर दी गई थी।
साथ ही, अदालत को गुमराह करने, कूट रचित दस्तावेज (फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र) तैयार करने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए आरोपी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की गई है।
अग्रिम कार्यवाही:
अब इस मामले में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की नई धाराओं के साथ मुकदमा पुनर्जीवित होकर चलेगा ।
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