कंगना रनौत मामला: किसानों के अपमान और राजद्रोह के आरोप पर कल बुधवार को आगरा एमपी-एमएलए कोर्ट में होगी दोनों पक्षों की बहस

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आगरा ।

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ चल रहे किसानों के अपमान और राजद्रोह के मामले में कल एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है।

इस मामले में कल बुधवार को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस सुनी जाएगी।

इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो विगत 3 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 16 अप्रैल 2026 की तिथि नियत की थी।

हालांकि, उस तारीख को किसी कारणवश निर्णय नहीं हो सका, जिसके बाद कोर्ट ने आदेश सुनाने के लिए 30 अप्रैल 2026 की नई तिथि तय कर दी थी।

इसी बीच, 21 अप्रैल 2026 को इस मामले में एक नया मोड़ आया जब विपक्षी पक्ष यानी कंगना रनौत की मुख्य अधिवक्ता अनसूया चौधरी की ओर से उनकी जूनियर वकील सुधा प्रधान ने बिना किसी नियत तिथि के अदालत में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।

इस प्रार्थना पत्र में दावा किया गया था कि कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को वादी पक्ष को इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (आईटी एक्ट) पर बहस करने की अनुमति दी थी और फाइल को मार्क करने का अवसर दिया था, जो वादी के लिए एकतरफा लाभ की स्थिति पैदा करता है।

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इस आधार पर विपक्ष ने अदालत से अनुरोध किया था कि 30 अप्रैल 2026 को अंतिम निर्णय न सुनाया जाए, क्योंकि वे मामले से जुड़े कुछ अन्य प्रपत्र (दस्तावेज) अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं।

इस प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए वादी पक्ष के अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 30 अप्रैल 2026 को अदालत में अपना लिखित जवाब दाखिल किया।

रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी पक्ष ने माननीय न्यायालय की निष्पक्ष न्याय प्रणाली पर पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार आरोप लगाए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल को न तो आईटी एक्ट पर कोई बहस हुई थी और न ही किसी फाइल को मार्क किया गया था।

वास्तविकता यह थी कि पत्रावली के कुछ प्रमुख दस्तावेजों पर फ्लैग (निशान) लगाने की मौखिक अनुमति माननीय न्यायालय से मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया था।

वादी अधिवक्ता ने अपने जवाब में यह भी बताया कि कोर्ट के पेशकार और खुद विपक्ष की जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान की मौजूदगी में ही कुछ प्रपत्रों पर फ्लैग लगाए गए थे।

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इतना ही नहीं, सुधा प्रधान के कहने पर वादी ने अपने दस्तावेजों के साथ-साथ विपक्ष द्वारा फाइल में लगाए गए प्रपत्रों पर भी फ्लैग लगवाए थे।

अंततः, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों का गहराई से अवलोकन करने के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विपक्षी पक्ष को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का एक अवसर प्रदान किया।

इसी के साथ अदालत ने विपक्ष के निवेदन को स्वीकार करते हुए 30 अप्रैल को अपना निर्णय टाल दिया था और कल बुधवार की तिथि पुनः अंतिम बहस के लिए नियत की थी, जिस पर कल कोर्ट में दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे।

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विवेक कुमार जैन
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