आगरा ।
लखनऊ में पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं के चेंबर तोड़े जाने और उन पर किए गए बर्बर लाठीचार्ज की गूंज अब आगरा तक पहुंच गई है।
आगरा के विभिन्न विधि संगठनों ने इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, बर्खास्तगी और अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
राजीव गांधी बार एसोसिएशन ने इस घटना के विरोध में एक अनोखा और शांतिपूर्ण रास्ता अपनाया। दीवानी कचहरी के गेट नंबर 2 पर बार के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के नेतृत्व में तमाम अधिवक्ताओं ने तैनात पुलिसकर्मियों को गुलाब के फूल भेंट किए।
अधिवक्ताओं ने गांधीवादी तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते हुए लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के नारे लगाए।

इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बार के महासचिव राजेंद्र गुप्ता धीरज, सचिव आईडी श्रीवास्तव, पवन कुमार गौतम, दिनेश चंद्र शर्मा, ओंकार सिंह, बी एस फौजदार, लाखन सिंह, सत्य प्रकाश शर्मा, रामदत्त दिवाकर, अमरनाथ सोलंकी, मोहन सिंह, मुकेश कुमार, पवन शर्मा, चंद्रभान निर्मल और रतीराम सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। इस पूरी कार्रवाई का संचालन बार के सचिव आईडी श्रीवास्तव एडवोकेट द्वारा किया गया।
दूसरी ओर, यूनाइटेड बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट आगरा ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। अध्यक्ष अनूप कुमार शर्मा एडवोकेट के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन में उत्तर प्रदेश सरकार से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने एक बहुमंजिली इमारत का निर्माण कराकर वकीलों को बैठने के लिए उचित चेंबर मुहैया कराने की भी अपील की।

इस प्रतिनिधिमंडल में विवेक पाराशर, रामेंद्र पचौरी, सुनील पाराशर, सुधीर शर्मा, हेमेंद्र गर्ग, अश्वनी खन्ना, नरेश पारस, शानू खान, रिंकी राजपूत, पवन शर्मा, हंसिका राठौर, रोशनी गुप्ता, विनीता अग्रवाल, सुदेश मिश्रा, अधर शर्मा, अरविंद दुबे, विमल तिवारी, निशकांत शर्मा और महावीर शर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इसी क्रम में बार एसोसिएशन खेरागढ़, आगरा ने भी उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपना गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
बार एसोसिएशन खेरागढ़ के अध्यक्ष हरिओम सिंह सिकरवार एडवोकेट ने कहा कि 17 मई 2026 को लखनऊ में निहत्थे और निर्दोष अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा किया गया अमानवीय और बर्बर लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है।

इस घटना में कई वकीलों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने महिला अधिवक्ताओं को भी नहीं बख्शा। ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्व में भी अधिवक्ताओं के साथ ऐसी गंभीर घटनाएं होती रही हैं, जिन पर प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
खेरागढ़ बार एसोसिएशन ने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाए और प्रदेश में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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