कोर्ट ने कहा वकीलों का अभद्र व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
जिला जज से अधिवक्ता के आचरण को लेकर दो वर्ष बाद मांगी रिपोर्ट
आगरा / प्रयागराज 25 सितंबर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों द्वारा न्यायाधीशों के प्रति अशिष्ट व्यवहार की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने क्षमा मांगने पर अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना कार्रवाई समाप्त तो कर दी, परन्तु उसे निगरानी में रखा है। जिला जज कानपुर नगर को दो वर्ष बाद याची के आचरण को लेकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा तथा न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायाधीशों के खिलाफ असंयमित भाषा का प्रयोग करने से बचेंगे ।
पीठ ने कहा कि
“अधिवक्ताओं द्वारा पीठासीन न्यायाधीश के प्रति अभद्र व्यवहार किए जाने की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। न्यायाधीश केवल सौहार्दपूर्ण वातावरण में ही काम कर सकते हैं।”

हाईकोर्ट एक सिविल जज कानपुर नगर द्वारा योगेन्द्र त्रिवेदी नामक वकील के खिलाफ 4 फरवरी 2023 को भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई कर रही थी। अधिवक्ता त्रिवेदी ने पिछले साल हुई एक अदालती कार्यवाही के दौरान कथित तौर पर कोर्ट स्टाफ से एक फाइल छीन ली थी और ट्रायल जज के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी।
सुनवाई के दौरान आरोपित अधिवक्ता कोर्ट में हाजिर हुए और उन्होंने कहा कि वह अब कभी भी इस तरह की अवज्ञाकारी हरकत नहीं दोहराएंगे।
हाईकोर्ट ने कहा
“हम इस मामले में अधिक गंभीर दृष्टिकोण अपनाने के लिए इच्छुक थे, लेकिन इस तथ्य पर विचार करते हुए कि अवमाननाकर्ता एक युवा अधिवक्ता है और उसके द्वारा इस तरह के आचरण का कोई पूर्व आरोप नहीं लगाया गया है, हम उसे सख्त चेतावनी जारी करके वर्तमान कार्यवाही को समाप्त करते हैं। हालांकि, हम यह स्पष्ट करते हैं कि यदि अवमाननाकर्ता की ओर से ऐसा कोई अवांछनीय कृत्य हमारे संज्ञान में लाया जाता है तो यह न्यायालय तत्काल अवमानना की कार्यवाही को फिर से शुरू करेगा और मामले में गंभीरता से विचार करेगा,”
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