परिवार अदालत का सराहनीय निर्णय: 8 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी का मात्र दो माह में हुआ विवाह विच्छेद

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आगरा:

आपसी सहमति और वैचारिक मतभेदों के चलते वर्षों से अलग रह रहे एक दंपति को परिवार न्यायालय ने बड़ी राहत दी है।

सामान्यतः छह माह की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि (Cooling-off Period) को समाप्त करते हुए, अदालत ने याचिका दाखिल होने के मात्र दो माह के भीतर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री पारित कर दी है।

2016 से अलग रह रहा था दंपति:

मामले के अनुसार, ग्रेटर नोएडा निवासी युवक का विवाह वर्ष 2012 में आगरा के कमला नगर निवासी युवती के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के पश्चात वर्ष 2013 में उनके एक पुत्र भी हुआ।

हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के मध्य वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गए, जिसके चलते वे वर्ष 2016 से ही एक-दूसरे से अलग रह रहे थे।

अधिवक्ताओं के माध्यम से पेश की साझा याचिका:

जब सुलह की कोई गुंजाइश नहीं रही, तो पति-पत्नी ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।

उन्होंने अपने अधिवक्ता शैलेन्द्र पाल सिंह एवं आकाश दीक्षित के माध्यम से परिवार न्यायालय में विवाह विच्छेद हेतु याचिका प्रस्तुत की।

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कोर्ट ने दी 6 माह की अवधि से छूट:

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, आपसी सहमति से तलाक (Section 13B) के मामलों में याचिका दाखिल करने के बाद 6 माह का ‘वेटिंग पीरियड’ दिया जाता है।

लेकिन इस मामले में:

* दंपति पिछले 8 वर्षों से अलग रह रहे थे।

* उनके बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना शेष नहीं थी।

तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, परिवार न्यायाधीश ने प्रतीक्षा अवधि की अनिवार्यता को समाप्त (Waive off) कर दिया और याचिका प्रस्तुत होने के दो माह के भीतर ही विवाह विच्छेद के आदेश पारित कर दिए।

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि यदि पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हों और भविष्य में साथ रहने की संभावना न हो, तो न्यायालय न्याय के हित में अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि में छूट दे सकता है।

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विवेक कुमार जैन
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