न्यायमूर्ति खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने इस वर्ष की शुरुआत में चुनाव आयोग की नियुक्तियों से संबंधित कानून पर रोक लगाने से कर दिया था इंकार
आगरा /नई दिल्ली 04 दिसंबर ।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ आज मामले की सुनवाई करने वाली थी, लेकिन सीजेआई ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
सीजेआई ने कहा,
“इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका मैं हिस्सा नहीं हूं।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मामले को अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2025 में सूचीबद्ध किया जाए।
न्यायमूर्ति खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने इस साल की शुरुआत में चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर कानून पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।

कानून में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति द्वारा पदों पर नियुक्ति का प्रावधान है।
इसने दो चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति में हस्तक्षेप करने से भी इंकार कर दिया था।
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मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ और अन्य में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए निर्देश के विपरीत है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सीजेआई को शामिल करने की बात कही गई थी।
केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि भारत में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति 73 वर्षों से अधिक समय से विशेष रूप से कार्यपालिका द्वारा की जा रही है।
[डॉ. जया ठाकुर और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य]
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साभार: बार & बेंच
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