आगरा जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय का बड़ा फैसला: फ्लाइट और सामान छूटने पर टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा देने का आदेश

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने सेवा में कमी के एक मामले में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित दंपति को 1.70 लाख रुपये का हर्जाना और मानसिक कष्ट व वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये का भुगतान करे।

मामले का विवरण:

यह मामला आगरा के ओल्ड विजय नगर कॉलोनी निवासी कपिल मित्तल और उनकी पत्नी श्रीमती शिवि मित्तल से जुड़ा है।

दंपति ने अपनी यूरोप यात्रा को सुरक्षित करने के लिए टाटा एआईजी से ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी।

फरवरी 2020 में अपनी यात्रा के दौरान उन्हें पैरागुए से वियना जाना था और वहां से एयर इंडिया की कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़कर दिल्ली लौटना था।

समस्या का कारण:

यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलियन एयरलाइंस की उड़ान में देरी हो गई, जिसके कारण दंपति की दिल्ली आने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई।

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इस अव्यवस्था की वजह से उनका सामान भी एयरलाइन के पास रह गया। बिना आवश्यक कपड़ों और सामान के उन्हें होटल में रुकना पड़ा, जिससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि भारी मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।

आयोग का निर्णय:

पीड़ित पक्ष ने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।

मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक ने वादी के तर्कों को सही पाया।

आयोग ने माना कि पॉलिसी होने के बावजूद कंपनी द्वारा सहायता न देना सेवा में दोष है।

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मुख्य निर्देश:

1. बीमा कंपनी वादी को 1,70,000/- रुपये की राशि 45 दिन के भीतर अदा करे।

2. मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 15,000/- रुपये अतिरिक्त दिए जाएं।

आयोग के इस फैसले ने स्पष्ट किया है कि विदेश यात्रा के दौरान बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोपरि है।

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विवेक कुमार जैन
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