आगरा ।
आगरा की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-02 माननीय बटेश्वर कुमार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के एक मामले में चार्जशीट से हटाए गए चार आरोपियों को विचारण (ट्रायल) के लिए तलब करने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने यह आदेश वादी मुकदमा विशाल सिंह और अन्य द्वारा दायर दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) की धारा 319 के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए दिया।
वादी की तरफ़ से पैरवी अधिवक्ता राजीव कांत गौतम और अधिवक्ता संदीप ने की ।
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मामला और आरोप:
* यह मामला थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमा संख्या 551/2013 से संबंधित है।
* वादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि मुख्य अभियुक्त पवन कुमार सिंह ने खुद को एक कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बताकर लोगों से चार साल में पैसा दोगुना करने का वादा किया और गारंटी देकर विश्वास में लिया।
* इस तरह छल-कपट से वादीगण से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त कर ली गई, लेकिन बाद में अभियुक्तगण कार्यालय बंद करके भाग गए और पैसा वापस नहीं किया। यह भी आरोप लगाया गया कि पैसे लेने के लिए दी गई रसीदें फर्जी थीं।
* प्राथमिकी (FIR) में कुल छह लोगों – पवन कुमार सिंह, किशन सिंह, बबली, मेघाली, रेनू और दीपक उर्फ बंटी को नामजद किया गया था।
विवेचना और न्यायालय का निर्णय:
* पुलिस विवेचना के बाद, विवेचक (जांच अधिकारी) ने केवल पवन कुमार सिंह और किशन सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया और शेष चार आरोपियों – दीपक उर्फ बंटी, बबली, मेघाली और रेनू का नाम हटा दिया था।
* वादी पक्ष ने धारा 319 Cr.P.C. के तहत न्यायालय से इन हटाए गए अभियुक्तों को तलब करने की मांग की। न्यायालय ने पाया कि विचारण के दौरान दर्ज गवाहों (PW-1 विशाल सिंह व अन्य) ने अपनी मुख्य परीक्षा और जिरह में सभी अभियुक्तगण की संलिप्तता का समर्थन किया है।
* न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि व्यवस्थाओं के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि इन चारों आरोपियों के विरुद्ध भी विचारण हेतु पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
* कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि ये आरोपी भी षडयंत्र करके अपराध करने में शामिल रहे हैं।
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इन धाराओं के तहत ट्रायल का आदेश
न्यायालय ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए, दीपक उर्फ बंटी, बबली, मेघाली और रेनू को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी ) की निम्नलिखित धाराओं के तहत विचारण के लिए तलब करने का आदेश दिया है:
* धारा 420: धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना
* धारा 467: मूल्यवान प्रतिभूति (valuable security) की जालसाजी
* धारा 468: धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी
* धारा 471: जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में उपयोग करना
* धारा 504: शांति भंग करने के इरादे से अपमान
* धारा 506: आपराधिक धमकी
* धारा 120बी: आपराधिक षडयंत्र
* धारा 34: सामान्य आशय (Common Intention)
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