आगरा।
जनपद के थाना बरहन क्षेत्र में जानलेवा हमले के आरोपी दो सगे भाइयों को जिला न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
पुलिस द्वारा समय पर पूरक चिकित्सकीय आख्या (Supplementary Medical Report) प्रस्तुत न करने और विवेचना में ढिलाई बरतने के आधार पर जिला जज ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
घटना का विवरण:
मामला थाना बरहन के ग्राम उदई का है। वादी राजवीर द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, 16 जनवरी 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे उनका पुत्र विवेक अपने चचेरे भाई आकाश के साथ साइकिल से काम पर जा रहा था।
आरोप है कि रास्ते में आरोपी अमित और सुमित (पुत्रगण कृष्ण) ने अपने अन्य साथियों के साथ उन्हें घेर लिया और लाठी, डंडे तथा लोहे की सरिया से उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे विवेक और आकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
न्यायालय में जमानत का आधार:
सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता विमल पाल सिंह बघेल एवं आकाश कुशवाह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के तर्कों और न्यायालय के अवलोकन में निम्नलिखित तथ्य सामने आए:
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* चिकित्सकीय रिपोर्ट का अभाव: घटना के काफी समय बाद भी थाना बरहन पुलिस घायल विवेक की पूरक चिकित्सकीय आख्या (Supplementary Medical Report) अदालत में पेश करने में विफल रही।
* विवेचक की लापरवाही: मामले के विवेचक (Investigating Officer) ने अभी तक संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज नहीं किए थे, जो चोटों की गंभीरता की पुष्टि के लिए अनिवार्य थे।
* साक्ष्यों की कमी: विवेचना में इन बुनियादी विधिक औपचारिकताओं के पूर्ण न होने के कारण आरोपियों को हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं मिल सका।
अदालत का फैसला:
जिला जज ने पुलिस की इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी भाइयों—सुमित और अमित—की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में देरी और साक्ष्यों के संकलन में पुलिस की विफलता का लाभ अभियुक्तों को मिलना न्यायसंगत है।
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