एसपी पीड़िता की दर्ज करायें एफआईआर
आगरा/प्रयागराज १० अप्रैल ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने थाना चंदौसी, संभल निवासी उस दम्पति व अबोध बच्चे को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है । जो विपरीत धर्म के है और लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। एक साल चार माह की अबोध बच्ची की तऱफ से याचिका दायर कर कहा गया था कि मां के पूर्व ससुराल वाले धमका रहे हैं।उनकी सुरक्षा को खतरा है ।
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने कहा कि बच्चे के जैविक पिता और माता अलग-अलग धर्म के हैं और 2018 से एक साथ रह रहे हैं।
खंडपीठ ने कहा कि बच्चे के माता-पिता कुछ खतरों से आशंकित हैं, जो जैविक मां के पूर्व ससुराल वालों की तरफ से है। पति की मृत्यु के बाद, बच्चे की जैविक मां अपने जैविक पिता के साथ रह रही है ।
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पीठ ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा,
“हमारे विचार में, संवैधानिक व्यवस्था के तहत वयस्क माता-पिता एक साथ रहने के हकदार हैं, भले ही उन्होंने विवाह न किया हो।”
बताया गया कि पुलिस अधिकारी आरोपित विपक्षियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को तैयार नहीं हैं और जब वह थाने में जाते हैं तो पुलिस अधिकारी बार-बार उन्हें अपमानित करते हैं।
कोर्ट ने संभल के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि यदि माता-पिता संबंधित पुलिस थाने में जाते हैं तो एफआइआर दर्ज की जाए। एसपी इस पहलू पर गौर करें कि “क्या कानून के अनुसार बच्चे और माता-पिता को कोई सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है ? तो नियमानुसार सुरक्षा प्रदान करें।
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