आगरा:
सामूहिक दुराचार और पॉक्सो एक्ट से संबंधित एक पुराने मामले में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने पर, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी ने सख्त रुख अपनाया है।
न्यायाधीश ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) लखनऊ को पत्र भेजकर, मामले के विवेचक/थानाध्यक्ष विनोद कुमार को 17 नवंबर को अनिवार्य रूप से अदालत में हाजिर कराने का निर्देश दिया है।
विवेचक का यह कृत्य, अदालत द्वारा ‘अत्यंत ही आपत्तिजनक’ माना गया है।
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क्या है मामला ?
यह मामला थाना एत्माद्दोला में वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था, जो सामूहिक दुराचार (गैंगरेप), पॉक्सो एक्ट, और अन्य संबंधित धाराओं से जुड़ा है।
* विचाराधीन मुकदमा: विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी की अदालत में यह मुकदमा (राज्य बनाम राकेश एवं अवधेश) विवेचक विनोद कुमार की गवाही के लिए लंबे समय से लंबित है।
* महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग: चूंकि यह मुकदमा वर्ष 2020 का है, इसलिए इसकी सुनवाई की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी की जा रही है।
विवेचक की लगातार अनुपस्थिति:
विवेचक विनोद कुमार, जो घटना के समय थाना एत्माद्दोला में तैनात थे, वर्तमान में थाना प्रभारी, थाना बीटा-2, गौतम बुद्ध नगर के रूप में कार्यरत हैं।
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* पूर्व में भी निर्देश: अदालत ने इससे पूर्व भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गौतम बुद्ध नगर को पत्र भेजकर विवेचक को हाजिर कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद वे गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुए।
* DGP को पत्र: विवेचक की इस लगातार लापरवाही को देखते हुए, विशेष न्यायाधीश ने सीधे DGP लखनऊ को पत्र प्रेषित किया है, जिसमें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विवेचक विनोद कुमार हर हाल में 17 नवंबर को अदालत में उपस्थित हों, ताकि पांच वर्ष पुराने इस गंभीर मामले का विचारण (ट्रायल) आगे बढ़ सके।
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