आगरा अदालत ने पुलिस पर फायर और अवैध हथियार मामले में आरोपी पवन को दी जमानत

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मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने किया था पवन को गिरफ्तार

आगरा।

विशेष न्यायाधीश (डी.ए.ए.)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-06, आगरा माननीय नीरज कुमार महाजन की अदालत मुकदमा अपराध संख्या 59/2025 के एक आरोपी, पवन पुत्र रामदेव, को जमानत दे दी है।

मामले का विवरण:

पवन पर थाना एकता, जिला आगरा में धारा 109(1) बी.एन.एस. (भारतीय न्याय संहिता) और 3/25/28 आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह जमानत प्रार्थना पत्र पवन की पैरोकार, श्रीमती सन्जू पत्नी रामदेव, द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के समर्थन में दिया गया था।

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अभियोजन कथानक के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को पुलिस गढ़ी देवरी अंडरपास के पास चेकिंग कर रही थी, जब उन्हें बाइक लूट और मोबाइल छीनने की घटना में शामिल अभियुक्तों के बारे में मुखबिर से सूचना मिली।

पुलिस ने इन अभियुक्तों का पीछा किया और मुठभेड़ के बाद उन्हें पकड़ लिया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में सुन्दर सिंह, सूरज, भरत, और पवन शामिल थे।

अदालत में प्रस्तुत तर्क:

* अभियुक्त के अधिवक्ता संदीप सिंह और रंजना शाक्य का तर्क था कि पवन निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है।पुलिस ने चेकिंग के दौरान कहा-सुनी होने पर उसे थाने भेज दिया और झूठी बरामदगी दिखाई। बरामदगी का कोई स्वतंत्र जनसाक्षी (Independent Public Witness) नहीं है। पवन ने कोई फायर नहीं किया और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई।

सरकारी वकील सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त पर पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से हमला करने और अवैध तमंचा रखने का आरोप है।यह प्रकरण गंभीर प्रकृति का है।

न्यायालय का निष्कर्ष और आदेश:

न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया।यह कि मुठभेड़ में किसी भी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई, जबकि नामित अभियुक्तों को चोटें दर्शित हैं।आवेदक/अभियुक्त से दर्शायी गई बरामदगी का कोई स्वतंत्र जनसाक्षी नहीं है।

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अभियोजन द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध कोई आपराधिक इतिहास प्रस्तुत नहीं किया गया है।अभियुक्त 26 नवंबर 2025 से जिला कारागार आगरा में निरुद्ध है।

अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता के साथ-साथ उपरोक्त सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, बिना गुण-दोष पर विचार किए, पवन को जमानत पर रिहा करने का आधार पर्याप्त पाया और अभियुक्त पवन पुत्र रामदेव का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उसे ₹50,000/- (पचास हजार रुपये) के व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) और समान धनराशि की दो प्रतिभूति (Sureties) न्यायालय की संतुष्टि के अधीन प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया ।

जमानत की शर्तों में यह भी शामिल है कि अभियुक्त गवाहों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रेरणा नहीं देगा और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा।

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विवेक कुमार जैन
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