आगरा।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए गवाही के लिए उपस्थित न होने पर मामले के विवेचक (उपनिरीक्षक) का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
यह मुकदमा हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग में होने के बावजूद विवेचक अदालत में पेश नहीं हो रहे थे। अदालत ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मैनपुरी को कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
उच्चतम न्यायालय द्वारा लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए देश भर में राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है और जनपदों में ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ सेल भी बनाए गए हैं, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
इसके बावजूद, मुकदमों की अहम कड़ी और मुख्य गवाह यानी विवेचक के ही गवाही देने न आने से न्याय प्रक्रिया और मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण प्रभावित हो रहा है।
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यह मामला वर्ष 2021 में थाना फतेहपुर सीकरी में दर्ज हुआ था, जो एक युवती के अपहरण, पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं से जुड़ा है (राज्य बनाम जुगेंद्र सिंह आदि)।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में यह मुकदमा उपनिरीक्षक और तत्कालीन विवेचक नील कमल की गवाही के लिए लंबे समय से लंबित है।
न्यायालय में विवेचक को छोड़कर अन्य सभी गवाहों की गवाही दर्ज की जा चुकी है।
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मुकदमा वर्षों से लंबित होने के कारण इसकी निगरानी स्वयं हाईकोर्ट द्वारा की जा रही है। बार-बार बुलाए जाने के बावजूद गवाही के लिए उपस्थित न होने पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी ने कड़ी नाराजगी जताई।
न्यायालय ने वर्तमान में जिला मैनपुरी के थाना एलाऊ में तैनात उपनिरीक्षक नील कमल का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोकने के लिए एसएसपी मैनपुरी को आदेशित किया है।
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