आगरा।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स और उसके स्थानीय डीलर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है।
आयोग ने विपक्षीगण को आदेश दिया है कि वे उपभोक्ता को नया एलईडी टीवी प्रदान करें अथवा खरीद की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ टीवी की पूरी कीमत वापस करें।
इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में हर्जाना देने का भी निर्देश दिया गया है।
यह मामला न्यू जनता कॉलोनी, सदर बाजार, आगरा निवासी घूरेलाल समाधिया का है, जिन्होंने दो अक्टूबर २०२२ को सदर बाजार स्थित राज म्यूजिको से ३०,५०० रुपये में एक सैमसंग एलईडी टीवी खरीदा था।
खरीद के समय डीलर ने उपभोक्ता को तीन वर्ष की वारंटी प्रदान की थी और वारंटी कार्ड पर मोहर व हस्ताक्षर भी किए थे।
लगभग एक वर्ष आठ महीने बाद जुलाई २०२४ में टीवी की स्क्रीन ने काम करना बंद कर दिया।

उपभोक्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर कंपनी के इंजीनियर ने निरीक्षण किया और पैनल बदलने के नाम पर वारंटी शर्तों का उल्लंघन करते हुए १६,९५५.९६ रुपये की मांग की।
कंपनी का दावा था कि निर्माता की ओर से केवल एक वर्ष की वारंटी दी जाती है और डीलर द्वारा दी गई अतिरिक्त वारंटी के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह स्पष्ट किया कि कोई भी अधिकृत डीलर निर्माता कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में ही कार्य करता है।
डीलर कंपनी के निर्देशों के विपरीत जाकर मनमाने तरीके से वारंटी अवधि नहीं बढ़ा सकता और कंपनी ने डीलर के मोहर व हस्ताक्षर वाले मूल वारंटी कार्ड का खंडन भी नहीं किया है।
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम २०१९ की धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि वारंटी अवधि में खराब उत्पाद की मुफ्त मरम्मत करना या मूल्य वापस करना निर्माता कंपनी और डीलर का संयुक्त व पृथक उत्तरदायित्व है।
आयोग ने विपक्षीगण को निर्णय की तिथि से ४५ दिन के भीतर उपभोक्ता को उसी मूल्य का नया एलईडी टीवी देने का आदेश दिया है।
ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें टीवी की मूल कीमत ३०,५०० रुपये पर खरीद की तिथि से भुगतान के दिन तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ राशि आयोग के खाते में जमा करनी होगी।
इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में ५,००० रुपये और वाद व्यय के रूप में ५,००० रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी देय होगी।
तय समय सीमा के भीतर आदेश का अनुपालन न करने पर ब्याज दर को बढ़ाकर नौ प्रतिशत वार्षिक कर दिया जाएगा।
भुगतान पूरा होने के बाद कंपनी खराब टीवी वापस लेने की हकदार होगी।
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