आगरा ।
आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा के साथ हुई अश्लील छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी ने मामले के विवेचक द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई एफआर (फाइनल रिपोर्ट यानी क्लोजर रिपोर्ट) को सिरे से निरस्त कर दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने थाना प्रभारी शाहगंज को इस मामले की गहराई से अग्रिम विवेचना करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, थाना शाहगंज में दर्ज मुकदमे में वादी ने आरोप लगाया था कि सितंबर 2023 में उनकी कक्षा 8 में पढ़ने वाली नाबालिग पुत्री के साथ स्कूल के ही एक सीनियर छात्र ने वाशरुम में अश्लील हरकत और छेड़छाड़ की थी।
इस घटना से पीड़ित छात्रा इतनी भयभीत हो गई कि उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। वादी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात सीनियर छात्र के खिलाफ छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
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वादी का आरोप है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने संस्थान की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए उन पर मुकदमा वापस लेने का लगातार दबाव बनाया।
जब वादी ने शिकायत वापस लेने से मना कर दिया, तो स्कूल प्रबंधन ने द्वेषवश बीच सत्र में ही पीड़ित छात्रा और उसकी छोटी बहन को स्कूल से निष्कासित कर दिया, जिससे दोनों बच्चियों का पूरा एक साल बर्बाद हो गया।
वादी ने यह भी आरोप लगाया कि मुकदमे के विवेचक ने आरोपी छात्र और स्कूल प्रबंधन के प्रभाव में आकर मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।
इस अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ वादी ने अपने अधिवक्ता दुर्गेश शर्मा और रोहित अग्रवाल के माध्यम से अदालत में एक विरोध आपत्ति याचिका दाखिल की।
अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि घटना के संबंध में स्कूल प्रबंधन से कई बार सीसीटीवी फुटेज मांगी गई, लेकिन उन्होंने पुलिस या वादी को फुटेज उपलब्ध नहीं कराई।
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घटना के महज दस दिन बाद ही स्कूल प्रबंधन ने फुटेज डिलीट होने का बहाना बना दिया। इसके अलावा, पीड़ित छात्रा ने अपने बयानों में स्पष्ट कहा था कि वह आरोपी सीनियर छात्र को सामने आने पर पहचान सकती है, लेकिन इसके बावजूद विवेचक और स्कूल प्रबंधन ने आरोपी की शिनाख्त परेड नहीं कराई।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि विवेचक ने स्कूल प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से जानबूझकर फाइनल रिपोर्ट अदालत में प्रेषित की थी।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी ने वादी के अधिवक्ताओं के तर्कों और मामले की गंभीर परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया और थाना शाहगंज पुलिस को मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।
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