आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने आदेशों की अवहेलना करने और नोटिस के बावजूद अदालत में पेश न होने पर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष ने विपक्षी अधिकारी के खिलाफ 5 हजार रुपये का जमानतीय वारंट (Bailable Warrant) जारी करने के आदेश दिए हैं।
19 साल पुराने मामले में कार्यवाही:
यह मामला वर्ष 2007 का है, जब वादी सतीश चंद गुप्ता ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के विरुद्ध जिला उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दायर किया था।
आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद वादी के पक्ष में फैसला सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट तक हारी परिषद:
जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ आवास विकास परिषद ने कानूनी लड़ाई को उच्च स्तर तक खींचा, लेकिन उसे हर जगह नाकामी हाथ लगी:
* राज्य उपभोक्ता आयोग: परिषद ने जिला आयोग के फैसले के खिलाफ अपील की, जहाँ राज्य आयोग ने केवल ‘फ्री-होल्ड शुल्क’ वसूलने की छूट दी, बाकी आदेश यथावत रखा।

* राष्ट्रीय आयोग (NCDRC) व सुप्रीम कोर्ट: परिषद ने राष्ट्रीय आयोग और तत्पश्चात माननीय उच्चतम न्यायालय की शरण ली, लेकिन वहां से भी परिषद को कोई राहत नहीं मिली और वादी के पक्ष में सुनाया गया मूल आदेश प्रभावी रहा।
क्यों जारी हुआ वारंट ?
उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन (Execution) सुनिश्चित कराने हेतु निष्पादन कार्यवाही शुरू की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत आयोग ने आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए थे। बार-बार बुलाने के बावजूद अधिकारी न तो उपस्थित हुए और न ही आदेश का अनुपालन किया।
अधिकारियों की इस अनुपस्थिति को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा मानते हुए आयोग के अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया और 5000/- रुपये का जमानतीय वारंट जारी कर उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
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