आगरा:
हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध किसानों के अपमान और विवादित बयानों को लेकर चल रहे मामले में स्पेशल कोर्ट (MP-MLA) माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत में शनिवार को लंबी बहस हुई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जो अब 16 अप्रैल 2026 को सुनाया जाएगा।
अदालत की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:
* जुर्माना अदा किया: पिछली सुनवाई के आदेश का अनुपालन करते हुए कंगना रनौत की ओर से उनकी अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने 500 रुपये का जुर्माना वादी पक्ष को अदा किया।
* लंबी बहस: दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक करीब तीन घंटे चली बहस में वादी और बचाव पक्ष के बीच तीखी दलीलें दी गईं।
* वादी का पक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा (वादी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान और अन्य ने पक्ष रखते हुए कहा कि कंगना के बयानों से देश के करोड़ों किसानों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने दलील दी कि 15 महीने चले किसान आंदोलन में 750 किसानों की शहादत हुई, जिसे कंगना ने अपमानित किया है।
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विवादित बयानों पर घिरीं कंगना:
वादी पक्ष ने कंगना के दो प्रमुख बयानों को आधार बनाया:
* किसान आंदोलन पर टिप्पणी: “किसान आंदोलन में बलात्कार और हत्याएं हो रही थीं।” वादी पक्ष ने कहा कि आंदोलन सिर्फ तीन कृषि कानूनों के खिलाफ था और इसमें किसी किसान पर बलात्कार या हत्या की FIR नहीं है।
* आजादी पर बयान: “1947 में मिली आजादी ‘भीख’ थी और असली आजादी 2014 में मिली।” वादी पक्ष ने सवाल उठाया कि क्या 2014 तक देश गुलाम था ?
बचाव पक्ष की दलीलें:
कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने पक्ष रखते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स (BBC, ABP और रजत शर्मा के इंटरव्यू) में यह दिखाया गया था कि धरना स्थल के पास खालिस्तान के नारे लगे थे और एक व्यक्ति की हत्या कर लाश लटकाई गई थी। उन्होंने बलात्कार की घटना का भी संदर्भ दिया।
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कोर्ट में वादी की प्रति-दलील:
वादी अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इसका खंडन करते हुए कहा कि यदि किसी भीड़ में दो-चार जेबकतरे आ जाएं, तो उससे पूरी भीड़ की गरिमा कम नहीं होती।
बलात्कार की घटना ट्रेन में हुई थी न कि धरना स्थल पर, और इसमें भी कोई किसान शामिल नहीं था। साथ ही, वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान ने पुलिस आख्या (225 CrPC) पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कंगना के वास्तविक बयान या हस्ताक्षर शामिल नहीं हैं।
आगामी तिथि:
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से संबंधित कानूनों पर विचार करने के बाद मामले को निर्णय के लिए सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी निगाहें 16 अप्रैल के फैसले पर टिकी हैं।
उपस्थिति:
इस दौरान अधिवक्ता राजवीर सिंह, दुर्गविजय सिंह भैया, पवन गौतम, जिला कांग्रेस मीडिया प्रभारी पवन कुमार शर्मा सहित कई अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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