आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए वादी के पक्ष में निर्णय सुनाया है।
आयोग ने ए.डी.ए. को निर्देशित किया है कि वह शासनादेश के अनुरूप वादी को विकलांग कोटे के तहत 10 प्रतिशत की छूट प्रदान करे और 60 दिन के भीतर भूखंड का बैनामा (Registry) सुनिश्चित करे।
क्या है पूरा मामला ?
शहीद नगर निवासी वादी वेद प्रकाश गौतम (पुत्र जे.एल. गौतम) ने अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
वादी का कथन था कि उन्होंने ए.डी.ए. की ‘ताज नगरी द्वितीय चरण योजना’ में विकलांग कोटे के अंतर्गत भूखंड के लिए आवेदन किया था।
वादी ने भूखंड की समस्त निर्धारित राशि जमा कर दी थी, इसके बावजूद ए.डी.ए. द्वारा बैनामा करने के बजाय वादी से अतिरिक्त ₹2,96,183/- की मांग की जा रही थी।
वादी का तर्क था कि नियमानुसार विकलांग श्रेणी में होने के कारण वह कुल राशि पर 10% की छूट पाने के पात्र हैं।
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आयोग का निर्णय:
मामले की सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए। तर्कों और साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष एवं सदस्य पारुल कौशिक ने ए.डी.ए. की मांग को अनुचित माना।
आदेश के मुख्य बिंदु:
* ए.डी.ए. को वादी को 10% की छूट देने का आदेश।
* आदेश की तिथि से 60 दिन के भीतर भूखंड का बैनामा वादी के हक में निष्पादित करना होगा।
* नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त धनराशि की मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
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