इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट मामले में जेल में बंद आरोपियों को नोटिस, पुलिस कमिश्नर को मुख्य साजिशकर्ता खोजने के निर्देश

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आगरा/प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायपालिका और न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक व अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायालय ने जेल में बंद दो आरोपियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

मामले की मुख्य कार्यवाही:

* अवमानना का मामला: जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस प्रशांत कुमार प्रथम की खंडपीठ ने अवमानना आवेदन पर सुनवाई करते हुए आरोपी दीपक सिंह और देवेंद्र सिंह को नोटिस जारी किया है। इन पर जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने का आरोप है।

* पुलिस को सख्त निर्देश: हाईकोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को विशेष निर्देश दिया है कि वह इस मामले की गहराई से जांच करें। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से उस ‘मुख्य व्यक्ति’ (Main Mastermind) का पता लगाने को कहा है जिसने इन आरोपियों को ऐसी अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए उकसाया या प्रेरित किया।

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* गिरफ्तारी और जेल: गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर ही प्रयागराज के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद 11 मार्च को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर नैनी जेल भेज दिया था।

अगली सुनवाई की तिथि:

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को होगी।

चूँकि यह मामला ‘न्यायालय की अवमानना अधिनियम’ (Contempt of Courts Act) के तहत न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यायिक अधिकारियों की छवि धूमिल करने वालों के साथ-साथ उनके पीछे छिपे चेहरों को भी बेनकाब किया जाए।

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मनीष वर्मा
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