आगरा/प्रयागराज।
नोएडा में पानी से भरे खुले तालाब में डूबने से युवा इंजीनियर युवराज मेहता की हुई दर्दनाक मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और नोएडा अथॉरिटी को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रति-हलफनामा (Counter-Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के मुख्य बिंदु:
* बेंच: मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ (Division Bench) कर रही है।
* समय की मांग: राज्य सरकार और नोएडा अथॉरिटी के अधिवक्ताओं ने कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय (मोहल्लत) मांगी है।
* कोर्ट का निर्देश: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई से पहले आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए और प्रस्तावित सुरक्षा कदमों का ब्योरा पेश किया जाए।

* अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई अब 17 मार्च को नियत की गई है।
जनहित याचिका (PIL) का विवरण:
यह याचिका हिमांशु जायसवाल द्वारा व्यक्तिगत रूप से (In-Person) दाखिल की गई है। उन्होंने कोर्ट में स्वयं बहस करते हुए इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी निकायों पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में निम्नलिखित को पक्षकार बनाया गया है:
* उत्तर प्रदेश सरकार एवं नोएडा अथॉरिटी।
* प्रमुख सचिव (सिंचाई), उत्तर प्रदेश।
* जिलाधिकारी (DM) एवं पुलिस कमिश्नर, नोएडा।
* महानिदेशक (DG), SDRF और NDRF।
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मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला नोएडा में एक खुले और पानी से भरे तालाब में गिरने से इंजीनियर युवराज मेहता की आकस्मिक मृत्यु से संबंधित है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
इस मामले में महत्वपूर्ण यह है कि हाईकोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासन ने क्या ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ तैयार किए हैं ?
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