बैंक की तकनीकी चूक ग्राहक पर भारी: उपभोक्ता अदालत प्रथम आगरा ने केनरा बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया

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आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केनरा बैंक को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है।

आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह परिवादिनी के खाते से गलत तरीके से कम की गई धनराशि ब्याज सहित वापस करे और मानसिक पीड़ा के लिए क्षतिपूर्ति भी दे।

मामले की पृष्ठभूमि:

परिवादिनी श्रीमती बीना बंसल का तत्कालीन सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) में वर्ष 2000 से एक बचत खाता संचालित था। बैंक मर्जर के बाद, नवंबर 2022 में बैंक द्वारा जारी पासबुक की प्रविष्टि में उनके खाते से 2,00,000/- रुपये कम दर्शाए गए।

विवाद तब बढ़ा जब 15 दिसंबर 2022 को परिवादिनी द्वारा 1,50,000/- रुपये का चेक प्रस्तुत करने पर बैंक ने खाते में “अपर्याप्त धनराशि” बताते हुए उसे बाउंस कर दिया।

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बैंक का तर्क: ‘तकनीकी खराबी’:

बैंक ने अपनी सफाई में कहा कि किसी भी धनराशि की कटौती नहीं की गई थी, बल्कि कंप्यूटर प्रिंटर में तकनीकी खराबी के कारण पासबुक में गलत प्रविष्टि छप गई थी।

बैंक का दावा था कि चेक प्रस्तुत करने के समय खाते में मात्र 59,955.03 रुपये ही शेष थे, इसलिए भुगतान नहीं किया गया।

आयोग का अवलोकन और निर्णय:

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए बैंक के तर्कों को खारिज कर दिया।

आयोग ने पाया कि:

* पासबुक की प्रामाणिकता: सूचना अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंक पासबुक में की गई प्रविष्टि को मानने के लिए बाध्य है।

* कंप्यूटर त्रुटि का खंडन: आयोग ने टिप्पणी की कि वर्तमान में सभी बैंक CBS (Core Banking Solution) पर कार्य कर रहे हैं और कंप्यूटर कभी स्वतः त्रुटिपूर्ण कार्य नहीं करता।

* साक्ष्यों में भिन्नता: बैंक द्वारा प्रस्तुत खाता विवरण (Statement of Account) और पासबुक की प्रविष्टियों में स्पष्ट रूप से 1,50,000/- रुपये का अंतर पाया गया।

अदालत का आदेश:

उपभोक्ता आयोग ने बैंक के कृत्य को सेवा में गंभीर कमी माना और निम्नलिखित आदेश पारित किए:

* धनराशि की वापसी: बैंक परिवादिनी के खाते से घटाई गई 1,50,000/- रुपये की राशि, परिवाद दाखिल करने की तिथि (27.04.2023) से 6% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करे।

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* क्षतिपूर्ति और वाद व्यय: मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का भुगतान किया जाए।

* समय सीमा: यदि बैंक 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे 6% के स्थान पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा ।

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विवेक कुमार जैन
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