इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश कि वाहन बिकने के बाद भी कागजों में दर्ज मालिक को ही पीड़ित को देना होगा मुआवजा

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा/प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजे के मामले में एक बड़ा कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई वाहन बेचा जा चुका है, लेकिन परिवहन विभाग (RTO) के रिकॉर्ड में उसका पंजीकरण अभी भी पुराने मालिक के नाम पर है, तो दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की जिम्मेदारी उसी पंजीकृत मालिक (Registered Owner) की होगी।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह मामला 26 फरवरी 2015 का है, जिसमें कार चालक धरमवीर की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। कर्मचारी मुआवजा आयुक्त, मुरादाबाद ने मृतक के आश्रितों को 8,26,495/- रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

Also Read – आगरा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट बलबीर सिंह बने ‘कानून राजतक’ के प्रबंध संपादक

न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय और टिप्पणियां:

* पंजीकृत मालिक की जवाबदेही: बीमा कंपनी का तर्क था कि वाहन के मूल मालिक (राकेश) ने कार किसी और को बेच दी थी, इसलिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है।

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पीड़ित को यह ढूंढने की जरूरत नहीं है कि वाहन कितनी बार बिका। कानूनन आरटीओ रिकॉर्ड में दर्ज मालिक ही जवाबदेह है।

* ड्राइवर का बीमा कवर: कोर्ट ने पाया कि पॉलिसी में IMT-29 के तहत प्रीमियम लिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहन में ड्राइवर ही मुख्य कर्मचारी होता है, अतः वह बीमा सुरक्षा के दायरे में आता है।

Also Read – आगरा की स्पेशल अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दी महिला को 6 माह की जेल और किया 6.25 लाख रुपये का जुर्माना

* मुआवजे की राशि: हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह ब्याज सहित कुल 17,94,718 रुपये की राशि दावेदारों को तत्काल वितरित करे।

जानिये आख़िर क्या है IMT-29 ?

IMT-29 (Indian Motor Tariff-29) मोटर बीमा पॉलिसी का वह विशेष प्रावधान है जो वाहन के ड्राइवर, कंडक्टर या अन्य कर्मचारियों को दुर्घटना की स्थिति में कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

कोर्ट ने IRDAI के 2023 के सर्कुलर का भी जिक्र किया, जिसके तहत अब निजी कार पॉलिसियों में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि

“कानूनी रूप से पंजीकृत मालिक और उसकी बीमा कंपनी ही मुआवजे के लिए उत्तरदायी होंगे, भले ही वाहन का भौतिक कब्जा किसी और के पास हो।”

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Channel BulletinGroup Bulletin

मनीष वर्मा
Follow Me

1 thought on “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश कि वाहन बिकने के बाद भी कागजों में दर्ज मालिक को ही पीड़ित को देना होगा मुआवजा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *