आगरा ।
विद्युत चोरी का मामला रफा-दफा करने के नाम पर रिश्वत लेने वाले बिजली विभाग के अधिकारियों पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) माननीय मृदुल दुबे ने आरोपी जेई राजेश कुमार और विद्युत कर्मी जय प्रकाश उर्फ मुन्नेश की जमानत अर्जी को अपराध की गंभीरता देखते हुए निरस्त कर दिया है।
विजिलेंस ने रंगे हाथों किया था गिरफ्तार:
मामला 16 जनवरी 2026 को एंटी करप्शन थाने में दर्ज कराया गया था। वादी नीरज कुमार ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2025 में जेई राजेश कुमार ने वादी के परिजनों के विरुद्ध बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज कराई थी।
इस मामले को खत्म करने के बदले में जेई ने 70 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी
शिकायत की पुष्टि होने पर विजिलेंस टीम (निरीक्षक सहवीर सिंह के नेतृत्व में) ने जाल बिछाया और वादी को पाउडर लगे हुए 500-500 के नोट दिए।
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पैसे लेते ही दबोचे गए आरोपी:
ट्रैप के दौरान, जैसे ही वादी ने पैसे दिए, जेई राजेश कुमार ने रिश्वत की राशि विद्युत कर्मी जय प्रकाश उर्फ मुन्नेश को थमाने का इशारा किया। उसी समय विजिलेंस टीम ने दोनों को 40 हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत की टिप्पणी:
अदालत में वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी घनश्याम गुप्ता ने आरोपियों की जमानत का पुरजोर विरोध किया।
उन्होंने तर्क दिया कि लोक सेवक होते हुए भ्रष्टाचार करना समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
साक्ष्यों और तर्कों को सुनने के बाद, न्यायाधीश माननीय मृदुल दुबे ने आरोपी जेई राजेश कुमार (निवासी मैनपुरी) और विद्युत कर्मी जयप्रकाश (निवासी करहल) को राहत देने से इंकार करते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
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