आगरा।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत जनपद में नव-गठित ‘विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ ने अपना पहला कड़ा फैसला सुनाया है।
विशेष न्यायाधीश माननीय मृदुल दुबे ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए लेखपाल रवेन्द्र कुमार की जमानत याचिका को अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दिया है।
नए थाने और नई अदालत का पहला मामला:
गौरतलब है कि जनपद में हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया गया है, जिसमें एडीजे माननीय मृदुल दुबे को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
साथ ही, ‘थाना सतर्कता अधिष्ठान आगरा’ के नाम से एक नया थाना भी सृजित किया गया है। इस नए न्यायालय और थाने में दर्ज यह पहला मामला था, जिसमें वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी घनश्याम गुप्ता ने सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की।
क्या था पूरा मामला ?
मामला फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज निवासी लेखपाल रवेन्द्र कुमार से जुड़ा है।
* विवाद: वादी सूबेदार का खेतों की कुरा बंदी का मामला एसडीएम न्यायिक जसराना की अदालत में लंबित था। अदालत ने लेखपाल रवेन्द्र कुमार को कुरा दाखिल करने का आदेश दिया था।
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* रिश्वत की मांग: आरोप है कि लेखपाल ने इस काम के बदले अपने बिचौलिए के माध्यम से 20 हजार रुपये की मांग की और पैसे न देने पर काम न करने की धमकी दी।
* ट्रैप की कार्रवाई: शिकायत मिलने पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने जाल बिछाया। 10 जनवरी 2026 को आरोपी लेखपाल को फिना फथलीन पाउडर लगे 500-500 के 20 नोटों की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत में चला गिरफ्तारी का वीडियो:
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी घनश्याम गुप्ता ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए तर्क दिया कि भ्रष्टाचार समाज के लिए एक कोढ़ है। अभियोजन की ओर से आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का वीडियो साक्ष्य के तौर पर पेन ड्राइव के माध्यम से अदालत में चलाया गया।
वीडियो साक्ष्य और अभियोजन के मजबूत तर्कों को स्वीकार करते हुए, विशेष न्यायाधीश माननीय मृदुल दुबे ने आरोपी लेखपाल की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले से भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच कड़ा संदेश गया है।
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