आगरा/प्रयागराज, 2 जुलाई 2025 ।
समाजवादी पार्टी (सपा) को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पीलीभीत में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) कार्यालय में अस्थाई तौर पर चल रहे सपा के जिला कार्यालय को प्रशासन द्वारा खाली कराए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस जयंत बनर्जी की डबल बेंच ने समाजवादी पार्टी कार्यालय की याचिका को खारिज करते हुए पार्टी को सिविल कोर्ट में अपनी पैरवी करने को कहा है।
मामले का विवरण:
पीलीभीत में सपा का जिला कार्यालय 2005 से नगर पालिका के ईओ ऑफिस में अस्थाई तौर पर संचालित हो रहा था। 12 नवंबर 2020 को नगर पालिका परिषद ने समाजवादी पार्टी को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के आवास के आवंटन को निरस्त कर दिया था। आवंटन निरस्त होने के बावजूद पार्टी ने इसे खाली नहीं किया था।
पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत:
2020 में भी आवंटन रद्द होने के खिलाफ सपा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब हाईकोर्ट ने पार्टी से पूछा था कि वह जिला कोर्ट में क्यों नहीं गए ?
जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई थी। हाल ही में, 16 जून को कार्यालय खाली करवाए जाने की नगर निगम की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल देने से मना करते हुए पार्टी को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा था।
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प्रशासन की कार्रवाई:
प्रशासन ने 18 जून को सपा के अस्थाई कार्यालय को खाली कराते हुए ताला लगा दिया था। इस कार्रवाई को समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें पीलीभीत जिला कार्यालय से बेदखली के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।
हाईकोर्ट का रुख:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज सपा की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला सिविल प्रकृति का है और पार्टी को सिविल कोर्ट में अपनी बात रखनी चाहिए।
गौरतलब है कि पीलीभीत के सिविल जज की कोर्ट में भी सपा कार्यालय के मामले में सुनवाई चल रही है। नगर पालिका परिषद की तरफ से अधिवक्ता विजय कुमार दीक्षित ने कोर्ट में पक्ष रखा। इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी को अपने पीलीभीत कार्यालय के लिए कानूनी लड़ाई अब सिविल कोर्ट में लड़नी होगी।
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