आगरा /इलाहाबाद ७ अप्रैल ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जिला अदालतों व सरकारी विभागों एवं हाईकोर्ट के बीच आपराधिक मामलों के दस्तावेज प्राप्त करने व भेजने में सामान्य तौर पर इलेक्ट्रॉनिक मोड का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह आदेश दस्तावेजों के सत्यापन में हो रही देरी को देखते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा दस्तावेज का सत्यापन समय से न कर पाने न्याय देने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना है। हाईकोर्ट रिपोर्ट मांगती है और रिपोर्ट आने में देरी होने से केस सुनवाई में देरी होती है।जो न्याय प्रशासन में व्यवधान डालना है।
इसी के साथ गौतमबुद्धनगर के सिविल जज कनिष्ठ श्रेणी /एफ टी सी में दहेज उत्पीड़न आदि आरोपों में चल रहे आपराधिक केस को पक्षों में समझौता होने के आधार पर रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने कहा आरोप ऐसे गंभीर नहीं जो समाज को प्रभावित करते हो,ऐसे में समझौता होने के बाद केस चलाना सही नहीं होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति ए के सिंह देशवाल की एकलपीठ ने गुलशन व दो अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
दस्तावेज सत्यापन रिपोर्ट आने में देरी के कारण कोर्ट ने डाक विभाग व रेलवे के अधिकारियों को तलब कर हलफनामा मांगा था। रिपोर्ट में कहा गया कि महाकुंभ के कारण डाक वितरण सही नहीं हो सका देरी हुई।इसपर कोर्ट ने कहा रेलवे व डाक विभाग पर दोष नहीं मढ़ा जा सकता।
इसलिए कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय के लिए निर्देश जारी किए हैं।
कोर्ट ने कहा है कि जिला अदालतों या विभागो द्वारा हाईकोर्ट को अनुपालन रिपोर्ट सामान्यतया ई मेल से भेजा जाय ।
हाईकोर्ट का कंप्यूटर सेंटर साफ्टवेयर विकसित करें जिससे जिला अदालतों से हाईकोर्ट को दस्तावेज भेजें व प्राप्त हो सके।
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कोर्ट को सिस्टम मैनेजर ने बताया अधिकांश अनुभागो में ई मेल आई डी है किन्तु अभी भी कुछ अनुभागों में नहीं है। कोर्ट ने हाईकोर्ट सी पी सी को इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कंप्यूटर सेंटर को साफ्टवेयर तैयार करने को कहा है जिससे रजिस्टर में प्रविष्टि के बजाय सीधे कंप्यूटर में ही दर्ज हो सके।
कोर्ट ने कहा रजिस्टर्ड पोस्ट के बजाय ई मेल से दस्तावेज भेजें। ताकि समय व धन की बर्बादी न हो सके।
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