आगरा / प्रयागराज 08 अक्टूबर।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी की तरह लिव इन रिलेशन में रहने वालों पर भी दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज हो सकता है।
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कोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या के केस के लिए जोड़े को पति-पत्नी की तरह जीवन यापन करना ही पर्याप्त है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने आदर्श यादव की अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।
प्रयागराज की कोतवाली 2022 में याची के खिलाफ दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज कराया गया था। आरोप लगाया गया कि शादी के लिए दहेज मांगने से तंग आकर पीड़िता ने खुदकुशी कर ली।

पुलिस ने दहेज हत्या के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने याची की अपराध से उन्मुक्त करने की अर्जी निरस्त कर दी। जिसे चुनौती दी गई थी।
याची का कहना था कि वह कानूनी तौर पर पीडि़ता का पति नहीं है इसलिए उसपर दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न का केस नहीं चलाया जा सकता।
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सरकारी वकील का कहना था कि मृतका की शादी अदालत के माध्यम से हुई थी। दहेज के लिए आवेदक मृतका को प्रताड़ित करता था। इसलिए पीड़िता ने खुदकुशी कर ली। विवाह की वैधता का परीक्षण ट्रायल में ही हो सकता है।
कोर्ट ने कहा केवल पति ही नहीं बल्कि उसके रिश्तेदार भी दहेज हत्या के लिए आरोपित हो सकते हैं। भले ही यह मान लिया जाए कि मृतका कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं थी। किंतु साक्ष्य है कि वे पति और पत्नी की तरह एक साथ रह रहे थे। इसलिए दहेज हत्या के प्रावधान इस मामले में लागू होंगे।
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