उपभोक्ता आयोग प्रथम का अहम फैसला: लोन चुकता होने के बाद मूल बैनामा वापस न करने पर पीएनबी पर लगाया दो लाख तीस हज़ार का जुर्माना

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आगरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब नेशनल बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।

बैंक द्वारा लोन चुकता होने के बाद भी ग्राहक का मूल बैनामा (टाईटिल डीड) वापस न करने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।

यह मामला परिवादी अशोक कुमार वर्मा का है, जो खुद पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।

उन्होंने अपनी सेवा के दौरान वर्ष 1997 में हाउसिंग लोन लिया था और अपने मकान का मूल पंजीकृत बैनामा बैंक की शिकोहाबाद शाखा में बंधक रखा था।

परिवादी ने 25 मई 2015 को ऋण की पूरी धनराशि चुकता कर दी थी, जिसके बाद बैंक ने खाता बंद कर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था।

हालांकि, बैंक ने परिवादी को उनका मूल बैनामा वापस नहीं किया और बाद में पत्राचार के दौरान बताया कि दस्तावेज शाखा में काफी ढूंढने पर भी मिल नहीं रहा है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार लोन चुकता होने के 30 दिन के भीतर मूल दस्तावेज वापस किए जाने चाहिए।

बैंक ऐसा करने में विफल रहा और उसने परिवादी के साथ सहयोग नहीं किया, जो सीधे तौर पर सेवा में कमी है।

आयोग ने अपने आदेश में पंजाब नेशनल बैंक को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर परिवादी को मूल बैनामा वापस प्राप्त कराए।

यदि बैंक ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसे परिवादी को 2,00,000/- रुपये का प्रतिकर (मुआवजा) 20,000/- रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 10,000/- रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे।

इसके अतिरिक्त, यदि मूल डीड खो गई है, तो बैंक को 60 दिन के भीतर अपने खर्च पर आगरा के किसी प्रमुख दैनिक समाचार पत्र (दैनिक जागरण, अमर उजाला या हिन्दुस्तान) में इसके खोने की सूचना प्रकाशित करानी होगी।

इसके बाद बैंक को स्वयं के खर्च पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से बैनामे की द्वितीय (प्रमाणित) प्रति प्राप्त कर परिवादी को सौंपनी होगी।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बैंक इस प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे तय राशि पर 25 मई 2015 (लोन चुकता होने की तिथि) से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

साथ ही, आदेश के 105 दिन बीत जाने के बाद जब तक बैनामे की प्रति उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक बैंक को 500/- रुपये प्रतिदिन के हिसाब से परिवादी को अतिरिक्त प्रतिकर का भुगतान करना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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