आगरा।
दहेज उत्पीड़न और प्रताड़ना के एक मामले में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति को दोषमुक्त (बरी) करने का आदेश दिया है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब वादिनी (पत्नी) ने स्वयं अदालत में स्वीकार किया कि उसने मायके वालों के बहकावे में आकर यह केस दर्ज कराया था।
क्या था आरोप?
शाहगंज थाने में दर्ज मामले के अनुसार, तुलसी बजट विला (पथोली) निवासी अंतरा घोष ने वर्ष 2024 में अपने पति सुजीत घोष और सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि 21 फरवरी 2020 को हुई शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज से संतुष्ट नहीं था। अंतरा ने आरोप लगाया था कि बच्चों के जन्म के बाद भी उसका उत्पीड़न जारी रहा और उसकी माँ द्वारा दिए गए सोने के जेवर सास ने अपने पास रख लिए थे।
गवाही के दौरान पलटा मामला:
मुकदमे के विचारण (Trial) के दौरान अदालत में मात्र वादिनी अंतरा घोष की ही गवाही दर्ज हुई। अपनी गवाही में अंतरा ने पूर्व में लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया।
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उसने अदालत को बताया कि:
* उसके पति ने उसका कभी कोई उत्पीड़न नहीं किया।
* मायके वालों के दबाव और बहकावे में आकर उसने थाने में तहरीर दी थी।
अदालत का फैसला:
आरोपी पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर गर्ग एवं नमिता गर्ग ने तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने वादिनी के बयान और रिकॉर्ड पर साक्ष्य न होने के आधार पर आरोपी पति सुजीत घोष को बाइज्जत बरी कर दिया।
मामले की मुख्य जानकारी:
* आरोपी: सुजीत घोष (निवासी शाहगंज, आगरा)।
* न्यायालय: विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, माननीय अचल प्रताप सिंह।
* बचाव पक्ष के वकील: सुधीर गर्ग और नमिता गर्ग।
* बरी होने का कारण: पत्नी का अपने आरोपों से मुकर जाना और साक्ष्यों का अभाव।
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