सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे पर अर्जित ब्याज पर टीडीएस देयता पर केंद्र सरकार से मांगा विचार

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आगरा / नई दिल्ली 03 अक्टूबर।

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को मोटर दुर्घटना दावों में दिए गए 50,000/- रुपये से अधिक मुआवजे पर ब्याज देयता पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की प्रयोज्यता पर केंद्र सरकार और आयकर विभाग से विचार मांगे।

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जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के समक्ष मामले को तेजी से निपटाने के लिए कई निर्देश मांगे गए।

न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिक्स क्यूरी एन. विजयराघवन ने न्यायालय को रूपेश रश्मिकांत शाह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लिए गए दृष्टिकोण से अवगत कराया, जिसमें दावा याचिका की तिथि से लेकर अवार्ड या अपील पारित होने तक मोटर दुर्घटना दावे में दिया गया ब्याज, आय न होने के कारण कर के योग्य नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार संघ/आयकर विभाग ने इस निर्णय को चुनौती नहीं दी।

न्यायालय ने इस पहलू पर संघ से जवाब मांगा।

16 नवंबर, 2021 के आदेश द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में टीडीएस दर में असमानता को स्वीकार किया था। इसके अनुसार, टीडीएस 10% से 20% है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि दावेदार के पास पैन कार्ड है या नहीं।

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न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान इस निर्देश से किया जा सकता है कि विधिक सेवा प्राधिकरण या कोई एजेंसी या मध्यस्थता समूह दावेदार को पैन कार्ड प्राप्त करने में सहायता करे, जहां दावेदार के पास पैन कार्ड नहीं है, जिससे स्रोत पर कर की 20% कटौती से बचा जा सके।

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2022 में न्यायालय ने केंद्र से मोटर दुर्घटना मुआवजा अवार्ड से स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के रूप में काटे गए धन के मुद्दे की जांच करने के लिए कहा था, जो दावेदारों के संबंध में दावा न किए गए रिफंड के रूप में पड़ा है, जो आयकर निर्धारण के दायरे में नहीं आते हैं।

केस टाइटल: बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य,

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साभार: लाइव लॉ

विवेक कुमार जैन
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