विवाहिता के अपहरण और दुराचार के आरोप में देवर बरी, बयानों में गंभीर विरोधाभास बना आधार

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आगरा:

विवाहिता के अपहरण, दुराचार, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के सनसनीखेज मामले में आरोपी देवर को एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बरी कर दिया है।

अदालत ने पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास और पीड़िता द्वारा मेडिकल कराने से इनकार करने को मुख्य आधार मानते हुए यह फैसला सुनाया।

क्या था मामला?

थाना कागारौल में दर्ज मुकदमे के अनुसार, पीड़िता/वादनी ने अपने चचेरे ससुर के पुत्र (देवर) ऋषिपाल (पुत्र ओमप्रकाश उर्फ ओमी, निवासी औरंगपुर, कागारौल, आगरा) पर आरोप लगाया था कि लगभग आठ माह पूर्व वह उसे बहला-फुसलाकर हरियाणा ले गया था।

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पीड़िता का आरोप था कि आरोपी देवर ने उसे दो माह तक अपने साथ रखा और इस दौरान उसके साथ दुराचार किया। विरोध करने पर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। बाद में आरोपी ऋषिपाल कथित तौर पर पीड़िता को रेलवे स्टेशन पर छोड़कर भाग गया था।

अदालत में विरोधाभास और साक्ष्य का अभाव:

पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन जब उसे मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, तो पीड़िता ने अपना मेडिकल कराने से साफ इंकार कर दिया।

* बयानों में विरोधाभास: मजिस्ट्रेट और अदालत के समक्ष दिए गए पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास उजागर हुआ।

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* गवाहों की अनभिज्ञता: अभियोजन पक्ष की तरफ से पीड़िता, उसके पति, जेठ, एस.आई. नीटू सिंह और पुलिस कर्मी मीनू को बतौर गवाह पेश किया गया। हालांकि, पीड़िता के पति और जेठ ने भी मामले से अनभिज्ञता दर्शाई।

* अन्य तथ्य: अदालत में यह भी सामने आया कि पीड़िता ने अपने पति से तलाक लेकर किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहना शुरू कर दिया था।

आरोपी के अधिवक्ता दया शंकर वर्मा के तर्कों और मामले में ठोस साक्ष्य के अभाव को देखते हुए, एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश माननीय बी नारायणन ने आरोपी देवर ऋषिपाल को बरी करने का आदेश दिया।

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विवेक कुमार जैन
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