धोखाधड़ी एवं अन्य आरोप मे वरिष्ठ पत्रकार दोषमुक्त

न्यायालय मुख्य सुर्खियां
वर्ष 2008 में थाना ताजगंज में दर्ज हुआ था मुकदमा
दिल्ली निवासी अशोक कुमार ने अपने पिता की फर्जी वसीयत बनाने का लगाया था आरोप
पत्रकार राजेंद्र सिंह, उनके छायाकार भाई, सहित 8 के विरुद्ध दर्ज हुआ था मुकदमा
फर्जी वसीयत की मूल प्रति ना वादी ने देखी ना ही उसके गवाहों ने, ना ही वसीयत की मूल प्रति अदालत में की गई प्रेषित
अदालत ने नजीर पत्रावली पर अंकित कर कहा कि भलें ही सौ दोषी छूट जाये पर किसी निर्दोष को नहीं होनी चाहिए सजा
करीब ढाई साल जेल में निरुद्ध रहना पड़ा था उनका पूरा परिवार बिखर गया था
पत्रकार ने कहा वह वादी एवं उसके गवाहो के विरुद्ध करेंगे मानहानि का मुकदमा

आगरा 26 मार्च ।

कथित धोखाधड़ी एवं अन्य धारा में आरोपित, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू पुत्र महेश सिंह निवासी न्यू एम.पी.पुरा, थाना ताजगंज, जिला आगरा को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय विनीता सिंह ने घटना के 17 वर्ष उपरांतदोष मुक्त करने के आदेश दिये।

थाना ताजगंज में दर्ज मामले के अनुसार दिल्ली निवासी वादी मुकदमा अशोक कुमार ने अदालत के आदेश पर छायाकार सतेंद्र सिंह उर्फ पप्पन, उनके भाई विजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, निवासी गण न्यू एम.पी. पुरा, थाना ताजगंज ,जिला आगरा, किशन गोपाल, टीकम सिंह उनके पिता खुशहाल सिंह निवासी गण सराय बेगा, थाना सिकन्दरा, जिला आगरा एवं रमेश चंद वर्मा पुत्र नाथू राम निवासी ग्राम बबाईन, खैरागढ़ जिला आगरा के विरुद्ध कथन किया था कि उसके पिता रूप सिंह के नाम मौजा बसई में 580 वर्ग मीटर जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज है । उसके पिता रूप सिंह का 7 जुलाई 1989 में निधन हो गया था।उक्त जमीन के वादी के अतिरिक्त उसके दो भाई एवं चार बहन भी कानूनी वारिस है।

वादी के चाचा महेंद्र सिंह के पुत्र सतेंद्र सिंह एवं प्रार्थना पत्र में वर्णित सभी लोगो ने जमीन हड़पने कें लिये उसके पिता की फर्जी वसीयत बना ली । उक्त वसीयत सतेंद्र सिंह के हक में 11 सितम्बर 1989 में तैयार कराई गई । जबकि उसके पिता की मृत्यु 7 जुलाई 1989 को हो गया था ।

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उक्त मामले में अन्य की पत्रावली पृथक हो जाने के कारण राजेंद्र सिंह का ही विचारण हुआ था।उक्त मामले मे वादी की पहुंच के चलते राजेंद्र सिंह को करीब ढाई वर्ष जेल में रहने के उपरांत बामुश्किल हाईकोर्ट से जमानत मिली थी ।

उक्त मामलें में वादी मुकदमा अशोक कुमार, विकास शल्या एवं सीओ मुनीश चन्द की ही गवाही दर्ज हुई थी।

मुकदमें के विचारण के दौरान वादी एवं उसके गवाह नें स्वीकृत किया कि उन्होने फर्जी वसीयत की मूल प्रति नहीँ देखी।ना ही उसे अदालत में प्रस्तुत किया।

विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय विनीता सिंह ने कथित आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता हेमेंद्र कुमार चतुवेर्दी एवं राजेश पराशर के तर्क पर उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित नजीर रंग बहादुर सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी को कोड कर कहा, भलें ही सौ दोषी छूट जाये परन्तु एक भी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिये। उक्त मामलें मे वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह के दोषमुक्त होने के बाद जिन आरोपियों की पत्रावली पृथक की गई हैं उनकी दोष मुक्ति की भी प्रबल संभावना बढ़ गयी हैं।

वरिष्ठ पत्रकार ने स्वयं की दोष मुक्ति पर अश्रु पूरित नेत्रों से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा आखिकार सत्य की जीत हुई। परन्तु बहुत देर हो गयी।इस मामले मे उन्होंने एवं उनके परिवार पर जो बीती उसे वह जीवन भर नहीँ भूल पाएंगे । उन्होंने अतीत की यादों में खोते हुये कहा वर्ष 2018 में वह सामान्य दिनों की तरह अपने आवास पर थे। तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उक्त मामलें मे जेल भेज दिया।

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उस समय उनकी पुत्री कक्षा 8 वीं एवं पुत्र कक्षा 3 का छात्र था। गिरफ्तारी से पूर्व वह एक समाचार पत्र में पत्रकार थे।जेल जाते ही नौकरी से तो हाथ धोना ही पड़ा । वादी एवं उसके गवाह विवेक शल्या एवं अन्य ने उनके मासूम बच्चों एवं उनके भाईयों को पुलिस एवं अन्य माध्यम से प्रताड़ित किया गया। जिस कारण बच्चे मानसिक अवसाद कें शिकार हो गये।अन्य की गिरफ्तारी हेतु पुलिस उनके घर आये दिन दविश दे हद दर्जे की अभद्रता करती थी।राजेन्द्र के

अनुसार विवेक शल्या की पत्नी के पीपीएस अधिकारी होने के कारण पुलिस हम लोगों की कोई बात सुनने को ही तैयार नहीं थी।

आर्थिक तंगी के तहत बेटी को पैदल स्कूल जाना पड़ता था।रास्ते मे विवेक शल्या का मेडिकल स्टोर पड़ता था। वह आये दिन बेटी से कहता था तेरे बाप को जेल में ही मरवा देंगे। राजेंद्र सिंह के अनुसार विवेक शल्या उसकीं मां एवं पत्नी नें उनके छोटे भाई सतेंद्र सिंह को भी नौकरी से निकलवा दिया।

उन्होंने अपनी पहुंच के चलते उन्हें जेल में 5 सी बैरक में रखवाया जहां मानसिक रूप से विक्षिप्त कैदी रहते है। विवेक शल्या ने हाईकोर्ट से उन्हे जमानत नही मिल सके इसकें लियें कई अधिवक्ता खड़े कर दिए थे । जिससे मुकदमा मजिस्ट्रेट ट्रायल होने के बाद भी उन्हें 33 महीने जेल में रहना पड़ा।

राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह विपक्षी अशोक गुप्ता, विवेक शल्या एवं अन्य के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा अदालत में करेंगे।

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विवेक कुमार जैन
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