आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम), आगरा द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान दो महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सुनाते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को बीमाधारक की विधवा को बकाया दुर्घटना हित लाभ (Accidental Benefit) भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
मामले का विवरण:
यह मामला श्रीमती रेखा देवी बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम से संबंधित है। रेखा देवी के पति, स्वर्गीय श्री विजय पाल सिंह की वर्ष 2017 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
मृतक के नाम पर एलआईसी की दो अलग-अलग पॉलिसियाँ थीं:
* पॉलिसी संख्या 265394346: बीमित राशि 1,25,000/- रुपये।
* पॉलिसी संख्या 264211581: बीमित राशि 50,000/- रुपये।
विवाद का मुख्य कारण:
परिवादिनी (रेखा देवी) के अनुसार, बीमा कंपनी ने मूल बीमित राशि का भुगतान तो कर दिया था, लेकिन पॉलिसियों के तहत मिलने वाले ‘दुर्घटना हित लाभ’ (दोगुनी राशि) को देने से इंकार कर दिया था।

एलआईसी द्वारा बार-बार पुलिस की ‘फाइनल रिपोर्ट’ (FR) की मांग की जा रही थी। रेखा देवी का तर्क था कि चूंकि यह किसी के विरुद्ध दर्ज मामला नहीं था, इसलिए फाइनल रिपोर्ट उपलब्ध कराना संभव नहीं था, जबकि पोस्टमार्टम और एफआईआर (GD) जैसे सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही सौंपे जा चुके थे।
आयोग का निर्णय और समझौता:
आयोग ने प्रथम दृष्टया सेवा में कमी (Deficiency in Service) का मामला मानते हुए इसे सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। अंततः, 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों की उपस्थिति में समझौता संपन्न हुआ:
* प्रथम वाद (171/2023): एलआईसी ने आयोग के खाते में 1,25,000/- रुपये जमा किए।
* द्वितीय वाद (172/2023): एलआईसी ने 50,000/- रुपये की राशि जमा की।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने आदेश दिया कि यह कुल 1,75,000/- रुपये की राशि परिवादिनी को अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से तत्काल भुगतान की जाए।
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