आगरा २३ मई ।
18 साल पुराने बिजली के तार और ट्रांसफॉर्मर चोरी के एक मामले में विशेष न्यायाधीश आर्थिक अपराध माननीय ज्ञानेंद्र राव ने आरोपी छोटू पुत्र रमाकांत ठाकुर (निवासी सिंगाइच, थाना जगनेर, आगरा) और देवेंद्र पुत्र मुरारी सिंह (निवासी ग्राम चावली, थाना बरहन, आगरा) को बरी करने का आदेश दिया है। पुलिस द्वारा बरामद तार को अदालत में पेश न कर पाने, स्वतंत्र गवाहों की कमी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मामले का विवरण
यह मामला सिकंदरा थाने में दर्ज किया गया था। अवर अभियंता 33/11के.वी. विद्युत गृह रुनकता, थाना सिकंदरा के मुखी सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 33 के.वी. विद्युत गृह सिकंदरा, आगरा से निकलने वाली 11 के.वी. सदर वन पोषक की एच.टी. लाइन से ग्राम पनवारी के पास से अज्ञात चोरों ने 4,320 मीटर तार और एक 25 के.वी.ए. का ट्रांसफॉर्मर चुरा लिया था।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी छोटू और देवेंद्र को हिरासत में लिया था और उनके कब्जे से 65 हाथ दो बा लिस्ट तार बरामद करने का दावा किया था।
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अभियोजन और बचाव पक्ष
अभियोजन पक्ष ने वादी मुखी सिंह, त्रिलोकी नाथ, एस.आई. अवधेश कुमार और एस.आई. महेंद्र पाल शर्मा को बतौर गवाह अदालत में पेश किया। वहीं, आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता रजभान सिंह यादव ने मुकदमे की पैरवी की।
अदालत का फैसला
अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा बरामद तार को अदालत में पेश नहीं किया गया, बरामदगी के समय स्वतंत्र गवाहों का अभाव था, और गवाहों के बयानों में विरोधाभास था।
इन्हीं आधारों पर अदालत ने आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला पुलिस जांच और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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