रज्जो बनाम एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. मामले में ₹1,44,000/- मुआवजे का दिया आदेश
आगरा।
स्थायी लोक अदालत, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में श्री रज्जो के पक्ष में निर्णय सुनाया है, जिनका वाहन चोरी हो गया था। कोर्ट ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बीमाधारक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने बीमा कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बीमा सूचना देने में देरी हुई थी।
मामले का विवरण
* परिवादी: श्री रज्जो, निवासी 2, राजीव नगर, ताजगंज, आगरा
* विपक्षी: एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
* केस संख्या: 37/2023
* निर्णय तिथि: 30 जून 2025
* अध्यक्षता: माननीय शोभा पोरवाल (अध्यक्ष), हेमलता गौतम (सदस्य), पद्मजा शर्मा (सदस्य)
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पृष्ठभूमि
श्री रज्जो ने अपनी कमर्शियल मोटर पैसेंजर कैरिंग इंश्योरेंस पॉलिसी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से ली थी, जिसकी वैधता 24 मार्च 2022 से 23 मार्च 2023 तक थी।
पॉलिसी की बीमा राशि ₹1,25,000/- थी और प्रीमियम ₹8,258 था। 30 मार्च 2022 की रात को श्री रज्जो ने अपनी गाड़ी (यूपी 80-ईटी -1554) अपने घर के बाहर पार्क की। 31 मार्च 2022 की सुबह 6:00 बजे जब वे जगे तो पाया कि गाड़ी चोरी हो गई थी।
कार्यवाही और तर्क
वाहन चोरी की घटना के बाद, श्री रज्जो ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और तीन दिन की तलाश के बाद 3 अप्रैल 2022 को एफआई आर दर्ज करवाई। पुलिस ने जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
हालांकि, श्री रज्जो ने बीमा कंपनी को इस चोरी की सूचना 4 अक्टूबर 2022 को दी, जिसमें 187 दिनों की देरी हुई। बीमा कंपनी ने इसी देरी को पॉलिसी शर्त संख्या 01 का उल्लंघन मानते हुए क्लेम को खारिज कर दिया।

अदालत का फैसला
स्थायी लोक अदालत ने सभी पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि परिवादी ने पुलिस को तुरंत सूचना दी थी और पुलिस जांच में चोरी की घटना सही पाई गई थी।
अदालत ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का हवाला दिया। अदालत ने जैना कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि चोरी की सूचना पुलिस को तुरंत दे दी गई हो और क्लेम फर्जी न हो तो सिर्फ बीमा कंपनी को सूचना देने में हुई देरी के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है।
अदालत ने बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत 2011 के पुराने फैसले को खारिज कर दिया, क्योंकि परिवादी द्वारा प्रस्तुत उच्चतम न्यायालय का फैसला (2022) अधिक प्रभावी था।
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अंतिम आदेश
कोर्ट ने श्री रज्जो का परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। अदालत ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को निम्नलिखित आदेश दिए:
* मुआवजे की राशि: ₹1,24,000/- (बीमा राशि में से ₹1,000/- का शुल्क घटाकर)
* ब्याज: 19 जून 2023 (परिवाद संस्थित होने की तिथि) से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक ब्याज।
* मानसिक और आर्थिक क्षति: ₹20,000/-
* भुगतान की समय सीमा: विपक्षी को एक महीने के भीतर उक्त राशि न्यायालय में जमा करनी होगी। यदि एक माह में राशि जमा नहीं की गई, तो ब्याज दर 12% वार्षिक होगी।
* भुगतान का प्राप्तकर्ता: चूंकि वाहन फाइनेंस पर था, इसलिए बीमा कंपनी द्वारा जमा की गई कुल राशि फाइनेंसर राज ट्रेडिंग कंपनी को दी जाएगी।इस फैसले में दोनों पक्षों को अपने-अपने वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया गया है।परिवादी की तरफ़ से प्रभावी पैरवी अधिवक्ता राघव सिंघल ने की ।
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