आगरा के आई एस बी टी चौराहे पर हुई हत्या और दलित उत्पीड़न के चार दोषियों को आजीवन कारावास

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आगरा।

जनपद के बहुचर्चित आईएसबीटी चौराहे पर हुए हत्याकांड और दलित उत्पीड़न के मामले में अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुनाया है।

विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार ने चार आरोपियों यूसुफ उर्फ बैंगन, चांद, वसीम और रवि उर्फ हकला को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही दोषियों पर कुल 2 लाख 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

जुर्माने की आधी राशि मिलेगी पीड़ित परिवार को:

अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश दिया कि अर्थदंड की कुल राशि में से आधी रकम (लगभग 1.05 लाख रुपये) मृतक ‘सूरज’ के परिजनों को मुआवजे के तौर पर दी जाए।

जानिए क्या था पूरा मामला ?

यह घटना 31 अगस्त 2014 की शाम करीब 7 बजे की है। थाना हरी पर्वत क्षेत्र के अंतर्गत बापू नगर (खंदारी) निवासी दयालु अपने साथियों मनोज, आकाश, सतीश और सूरज के साथ आईएसबीटी की ओर जा रहे थे।

रास्ते में आरोपियों को मोहल्ले के ही जगदीश के साथ मारपीट करते देख जब दयालु और उसके साथियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया।

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आरोपियों ने धारदार हथियारों से वार करने के बाद सतीश और सूरज को मरा हुआ समझकर छोड़ दिया और फिर दयालु व मनोज पर तमंचे से फायर झोंक दिया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने सूरज को मृत घोषित कर दिया था।

इस खूनी संघर्ष और आरोपियों की दहशत के कारण आईएसबीटी चौराहे पर हड़कंप मच गया था। दुकानदारों ने डर के मारे शटर गिरा दिए थे और बस पकड़ने आए यात्री अपना सामान छोड़कर भाग खड़े हुए थे।

कानूनी कार्रवाई और फैसला:

पुलिस ने इस मामले में यूसुफ उर्फ बैंगन, चांद, कालू, लाला, वसीम और रवि उर्फ हकला के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, बलवा और एससी /एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

आरोपी की मृत्यु और नाबालिग:

मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी कालू की मृत्यु हो गई, जिससे उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वहीं, आरोपी लाला के नाबालिग होने के कारण उसकी फाइल किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) को भेज दी गई थी।

विशेष न्यायाधीश ने मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घायलों के मेडिकल साक्ष्य, चश्मदीद गवाहों के बयान और सरकारी अधिवक्ता विजय वर्मा के ठोस तर्कों के आधार पर चारों मुख्य आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।

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विवेक कुमार जैन
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