आगरा।
अदालती कार्यवाही और गवाही के प्रति लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर अब न्यायपालिका ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, माननीय सोनिका चौधरी ने एक मुकदमे में बार-बार बुलाने के बावजूद गवाही देने न पहुंचने पर उपनिरीक्षक (SI) अनुज कुमार का वेतन रोकने का कड़ा आदेश जारी किया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कानपुर) को निर्देश:
विशेष अदालत ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कानपुर नगर को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि जब तक उपनिरीक्षक अनुज कुमार अदालत में उपस्थित होकर अपनी गवाही दर्ज नहीं कराते, तब तक उनका वेतन रोक दिया जाए।
क्या है पूरा मामला ?
मामला आगरा के थाना ताजगंज में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है (राज्य बनाम प्रदीप), जिसमें आरोपी पर अप्राकृतिक कृत्य, मारपीट, धमकी और पाक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराएं लगी हैं।
* विवेचक की भूमिका: इस मुकदमे की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक अनुज कुमार ने की थी।
* वर्तमान तैनाती: अनुज कुमार वर्तमान में कानपुर नगर के थाना रेउना में तैनात हैं।
* देरी का कारण: अदालत में मामले के अन्य सभी गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, लेकिन मुख्य विवेचक (Investigating Officer) के न आने के कारण मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
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अदालत की सख्त टिप्पणी:
न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नाराजगी व्यक्त की।
अदालत ने माना कि विवेचक की अनुपस्थिति के कारण न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जो न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी के चलते ‘नो वर्क, नो पे’ की तर्ज पर गवाही तक वेतन रोकने का अभूतपूर्व आदेश सुनाया गया।
मुख्य बिंदु:
* न्यायाधीश: माननीय सोनिका चौधरी (विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट)।
* अधिकारी: उपनिरीक्षक अनुज कुमार (तत्कालीन विवेचक, थाना ताजगंज)।
* कारण: गंभीर पाक्सो एक्ट मामले में गवाही के लिए अनुपस्थित रहना।
* प्रभाव: वेतन पर तब तक रोक रहेगी जब तक गवाही पूर्ण नहीं हो जाती।
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