ताजमहल/तेजोमहालय में पूजा अर्चना की मांग पर हुई सुनवाई, मुस्लिम पक्षकार बनने वाली अर्जी पर 22 जुलाई को होगी बहस

न्यायालय मुख्य सुर्खियां
दोनों पक्ष बहस को थे तैयार किंतु अन्य वादों की सुनवाई के चलतें न्यायालय में नहीं हो सकी बहस
कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रार्थना पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलतें नहीं हुई सुनवाई

आगरा २३ मई ।

ताजमहल/तेजोमहालय में पूजा-अर्चना की मांग को लेकर दायर वाद में शुक्रवार को लघुवाद न्यायालय में न्यायाधीश माननीय लाल बहादुर गौड़ की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्षकार बनने की अर्जी पर बहस होनी थी, लेकिन अन्य वादों की सुनवाई के चलते यह नहीं हो सकी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि:

योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने 23 जुलाई 2024 को सावन के महीने में ताजमहल को तेजोमहालय शिव मंदिर बताते हुए, यहां जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और अन्य हिंदू त्योहारों पर पूजा-अर्चना की मांग को लेकर अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर और झम्मन सिंह रघुवंशी के माध्यम से वाद दायर किया था।

पक्षकार बनने की अर्जी और आपत्ति:

इस मामले में सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी ने 23 सितंबर 2024 को ताजमहल को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए पक्षकार बनने की अर्जी दी थी। इस पर वादी कुंवर अजय तोमर के अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर ने 7 अक्टूबर 2024 को आपत्ति दाखिल करते हुए कहा था कि ताजमहल तेजोमहालय है, सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी की कोई निजी संपत्ति नहीं है और न ही वे शाहजहां या मुमताज के वंशज हैं, इसलिए उन्हें पक्षकार बनने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं, 27 नवंबर 2024 को हुई सुनवाई में प्रतिवादी एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् के अधिवक्ता विवेक कुमार ने भी सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी के पक्षकार बनने वाली अर्जी पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ताजमहल से संबंधित जानकारी मुहैया कराना और केस लड़ना एएसआई की जिम्मेदारी है, सैयद इब्राहिम हुसैन को कोई अधिकार नहीं है।

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सुनवाई की स्थिति:

आज दोनों पक्ष बहस के लिए तैयार थे और सुबह 11:30 बजे बहस होनी थी, लेकिन न्यायालय में अन्य वादों की सुनवाई के चलते बहस नहीं हो सकी। साथ ही, कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रार्थना पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते भी सुनवाई नहीं हो पाई।

वादी का आरोप और मांग:

योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हर बार तारीख दे दी जाती है, लेकिन कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया जाता।

उन्होंने जोर दिया कि उनके पास सभी साक्ष्य होने के बावजूद केवल तारीख मिल रही है। कुंवर अजय तोमर ने न्यायालय से हिंदू जन भावनाओं का ध्यान रखने और ताजमहल/तेजोमहालय प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सुनवाई कर पूजा-अर्चना की अनुमति दिए जाने की मांग की।

उन्होंने मुगलों की क्रूरता का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या, मथुरा, काशी और संभल सबसे बड़े उदाहरण हैं। उनका कहना था कि जब तक तेजोमहालय में विधिवत रूप से पूजा-अर्चना और दुग्धाभिषेक नहीं कर लेंगे, तब तक लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक पक्ष द्वारा वहां नमाज पढ़ना, चादरपोशी करना और शाहजहां का उर्स मनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वादी अधिवक्ता का पक्ष:

वादी अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर ने बताया कि आज उनकी बहस की पूरी तैयारी थी और वे मुस्लिम पक्षकार बनने वाली अर्जी को खारिज करवाने के लिए तैयार थे, लेकिन अन्य वादों के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई पर वे अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।

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ऐतिहासिक दावा:

वादी कुंवर अजय तोमर का दावा है कि तेजोमहालय शिव मंदिर का निर्माण राजा परमार्दिदेव द्वारा 1155 से 1212 के मध्य में किया गया था। बाद में राजा मानसिंह और राजा जयसिंह ने इसे अपना महल बनाया और शिव मंदिर को सुरक्षित रखा था।

उनका आरोप है कि शाहजहां ने अपने शासनकाल में राजा जयसिंह से धोखे से इसे हड़प लिया और यह झूठी कहानी गढ़ी गई कि यहां शाहजहां और मुमताज की कब्र है और यह एक मकबरा है, जबकि मुमताज का निधन 1631 में हो गया था और उन्हें मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे दफनाया गया था।

कुंवर अजय तोमर का कहना है कि ताजमहल तेजोमहालय शिव मंदिर है और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, जिसे वे लेकर रहेंगे।

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विवेक कुमार जैन
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