फतेहपुर सीकरी कामाख्या माता मंदिर केस: अब 7 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

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आगरा:

ऐतिहासिक नगर फतेहपुर सीकरी (विजयपुर सीकरी) स्थित दरगाह और मस्जिद परिसर को कामाख्या माता मंदिर होने का दावा करने वाले वाद ‘श्री भगवान श्री कामाख्या माता आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड आदि’ (केस संख्या- 113/2024) की सुनवाई अब 7 फरवरी को होगी।

मकर संक्रांति के अवकाश के कारण टली सुनवाई:

योगेश्वर श्रीकृष्ण सांस्कृतिक अनुसंधान संस्थान ट्रस्ट द्वारा दायर इस मामले की सुनवाई के लिए 15 जनवरी की तिथि नियत थी।

हालांकि, मकर संक्रांति के अवकाश के चलते न्यायालय की कार्यवाही नहीं हो सकी, जिसके बाद लघुवाद न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तारीख तय की है।

ऐतिहासिक दावों पर टिकी है कानूनी लड़ाई:

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के अनुसार, इस वाद में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दावे किए गए हैं:

* गर्भगृह का दावा: याचिका में कहा गया है कि सलीम चिश्ती की दरगाह मूल रूप से सिकरवार हिंदुओं की कुलदेवी कामाख्या माता मंदिर का गर्भगृह है।

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* मन्दिर परिसर: जामा मस्जिद को मंदिर का परिसर बताया गया है।

* विजयपुर सीकरी और राजा धामदेव: यह तर्क दिया गया है कि फतेहपुर सीकरी का मूल नाम ‘विजयपुर सीकरी’ था, जिसके अंतिम राजा धामदेव सिकरवार थे।

* बाबरनामा का संदर्भ: अधिवक्ता का कहना है कि 1527 ई. में बाबर के विरुद्ध युद्ध के बाद राजा धामदेव गहमर (गाजीपुर) चले गए थे। ‘बाबरनामा’ में उनका नाम ‘धरमदेव’ के रूप में दर्ज है और वे अपने साथ माता का विग्रह भी ले गए थे।

विपक्षी पक्ष और वर्तमान स्थिति:

मामले में विपक्षी संख्या 1 (सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड), विपक्षी संख्या 2 (प्रबंधन कमेटी दरगाह सलीम चिश्ती) और विपक्षी संख्या 3 (प्रबंधन कमेटी जामा मस्जिद) न्यायालय में हाजिर हो चुके हैं।

वर्तमान मेंविपक्षी संख्या 2 और 3 द्वारा दाखिल आदेश 7 नियम 14 का प्रार्थना पत्र अभी न्यायालय में विचाराधीन है।केस की समस्त कार्यवाही आगरा के लघुवाद न्यायालय (Small Cause Court) में संचालित की जा रही है।

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विवेक कुमार जैन
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