दिल्ली महिला कोर्ट ने उच्च-शिक्षित पत्नी की याचिका ख़ारिज करते हुए अंतरिम भरण-पोषण देने से किया इंकार

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आगरा/दिल्ली।

दिल्ली की महिला कोर्ट-03 की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी माननीय पूजा यादव ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 23 के तहत दायर अंतरिम भरण-पोषण की याचिका को ख़ारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

यह मामला आकांक्षा गहलोत बनाम प्रशांत चौहान व अन्य से संबंधित है, जिसमें पत्नी ने पति से अंतरिम मौद्रिक राहत की मांग की थी।

कोर्ट का निष्कर्ष:

• याचिकाकर्ता आकांक्षा गहलोत कानून में स्नातक हैं और दिल्ली महिला आयोग में पूर्व में ₹51,000/- मासिक वेतन पर कार्यरत थीं।

• कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता प्रथम दृष्टया डीवी एक्ट की धारा 2(ए ) के तहत “पीड़ित व्यक्ति” प्रतीत होती हैं, परंतु उन्होंने यह सिद्ध नहीं किया कि वे वर्तमान में काम करने में असमर्थ हैं।

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• याचिकाकर्ता के बेरोज़गार होने के दावे पर कोर्ट ने संदेह जताया, क्योंकि उनके बैंक खाते में मार्च 2024 के बाद कई क्रेडिट एंट्रीज़ दर्ज हैं।

• कोई संतान नहीं होने और कार्य करने में कोई बाधा न होने के कारण कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता इस स्तर पर अपना भरण-पोषण स्वयं करने में सक्षम हैं।

प्रतिवादी के तर्क:

• प्रतिवादी प्रशांत चौहान के अधिवक्ता के.के.शर्मा ने अदालत के सामने तर्क रखते हुए बताया कि याचिकाकर्ता एक लाइसेंस प्राप्त क़ानूनी व्यवसायी (वकील)हैं और वर्तमान में वरिष्ठों के साथ प्रैक्टिस कर रही हैं।

• उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षित महिला काम न करने का विकल्प चुनती है, तो वह अंतरिम भरण-पोषण की पात्र नहीं मानी जा सकती।

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अदालत का अंतिम आदेश:

कोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण और मौद्रिक राहत की याचिका को इस स्तर पर ख़ारिज कर दिया है। हालांकि, डीवी एक्ट की धारा 12 के तहत मांगी गई अन्य राहतों पर निर्णय ट्रायल की समाप्ति पर गुण-दोष के आधार पर लिया जाएगा।

याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई पर हलफ़नामे के माध्यम से अपना साक्ष्य दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

यह आदेश उन मामलों में मिसाल बन सकता है जहाँ याचिकाकर्ता की योग्यता और कार्य अनुभव को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण की मांग पर पुनर्विचार आवश्यक हो।

Attachment/Order/Judgement – DocScanner 27-Oct-2025 12-39 pm

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विवेक कुमार जैन
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