महिला कर्मचारी से अश्लील हरकत और उत्पीड़न:एडीओ (आईएसबी ) समेत तीन के खिलाफअदालत ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव की अदालत ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की एक क्लस्टर कर्मचारी के साथ अश्लील हरकत, यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

अदालत ने अकोला ब्लॉक के ADO (ISB) रविंद्र कुमार, एक महिला उप निरीक्षक और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष किरावली को दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप

ब्लॉक अकोला के ग्राम कराहरा में क्लस्टर पद पर कार्यरत पीड़िता ने वरिष्ठ अधिवक्ता वीर बहादुर सिंह धाकरे के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

पीड़िता के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

* अश्लील व्यवहार: ए डी ओ रविंद्र कुमार कार्यस्थल पर अश्लील गाने बजाते थे, गलत तरीके से घूरते थे और अश्लील शब्दों का प्रयोग कर अनैतिक प्रलोभन देते थे।

* शारीरिक उत्पीड़न: उपस्थिति रजिस्टर चेक करने के बहाने एकांत में बुलाकर अश्लील छेड़छाड़ करना और शरीर पर चुटकी काटना।

* अनैतिक दबाव: अकेली महिला को देख जानबूझकर सातों दिन क्लस्टर खोलने का दबाव बनाना और उपस्थिति दर्ज न करना।

Also Read – आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का कड़ा फैसला: टाटा प्ले (टाटा स्काई) को रिचार्ज की अतिरिक्त राशि वापस न करना पड़ा भारी

प्रमुख घटना और पुलिस की निष्क्रियता:

पीड़िता के अनुसार, 1 दिसंबर 2025 को विपक्षी ने कार्यस्थल पर गलत नियत से उसे पकड़ लिया और कपड़े अस्त-व्यस्त कर दिए। शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई,

बल्कि:

* आरोपी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़िता के भाई के खिलाफ थाना मलपुरा में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया।

* किरावली थाने की महिला उप निरीक्षक ने कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।

* अकोला ब्लॉक के बीएमएम (BMM) कर्मी आशीष दुबे पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप है।

Also Read – आगरा: जिला कारागार का निरीक्षण और ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 2.0’ अभियान पर विशेष बैठक संपन्न

न्यायालय का आदेश:

पीड़िता ने सीडीओ कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक गुहार लगाई थी, लेकिन सुनवाई न होने पर कोर्ट की शरण ली।

अदालत ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत तर्कों को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करना), 76 (पीछा करना/यौन उत्पीड़न) और 79 (शब्द, हाव-भाव से अपमान) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *