आगरा।
चांदी के आभूषण बनाने के बहाने निवेश कराकर लाखों रुपये का चूना लगाने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
₹6 लाख का चेक डिसऑनर होने पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-6 माननीय आतिफ सिद्दीकी ने आरोपी दीपक प्रजापति को मुकदमे के विचारण हेतु अदालत में तलब करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
वादी मंजीत सिंह (निवासी: जटपुरा, लोहामंडी) और आरोपी दीपक प्रजापति (निवासी: भगवती विहार, जगदीशपुरा) के बीच पुरानी मित्रता थी।
आरोपी दीपक चांदी के आइटम बनाने का कार्य करता है।
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मुख्य आरोप: मुनाफे का लालच और धोखाधड़ी
प्रार्थी मंजीत सिंह ने अपने अधिवक्ता राजेश यादव एवं अदिति यादव के माध्यम से न्यायालय को बताया कि:
* निवेश का झांसा: 5 जनवरी 2025 को आरोपी ने चांदी की कीमतें बढ़ने का हवाला देते हुए वादी को आभूषण निर्माण में निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच दिया।
* उधार धनराशि: आरोपी ने चांदी खरीदने के लिए वादी से ₹6 लाख उधार लिए और उन्हें 4 माह के भीतर वापस करने का वादा किया।
* चेक डिसऑनर: समय सीमा बीतने के बाद जब वादी ने पैसों की मांग की, तो आरोपी ने ₹6 लाख का एक चेक दिया। बैंक में भुगतान हेतु प्रस्तुत करने पर वह चेक ‘डिसऑनर’ (बाउंस) हो गया।
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न्यायालय की कार्यवाही:
वादी के अधिवक्ताओं के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए एसीजेएम-6 (ACJM-6) माननीय आतिफ सिद्दीकी ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला विचारण योग्य है।
न्यायालय ने आरोपी दीपक प्रजापति के विरुद्ध सम्मन जारी करते हुए उसे निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
विधिक जानकारी: चेक बाउंस का मामला ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट’ (NI Act) की धारा 138 के तहत आता है, जिसमें दोषी पाए जाने पर कारावास और चेक की राशि का दोगुना तक जुर्माना भरने का प्रावधान है।
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