आगरा।
जनपद के माननीय जिला जज ने थाना सदर क्षेत्र के अंतर्गत एक विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पति और जेठ की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।
न्यायालय ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने में हुई 11 दिन की देरी और विवेचक (Investigating Officer) की जांच रिपोर्ट को आधार मानते हुए नेपाल निवासी दोनों आरोपियों की रिहाई के आदेश जारी किए।
मामले की पृष्ठभूमि:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मनीराम ने थाना सदर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री मीरा का विवाह वर्ष 2011 में भगवान सिंह उर्फ अनूप सिंह के साथ हुआ था।
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आरोप था कि दहेज की मांग को लेकर पति भगवान सिंह और जेठ सूरज उर्फ मोहन बहादुर (निवासीगण छतरा गंज, जिला संदी खड़का, नेपाल; हाल निवासी बड़ा उखर्रा, आगरा) उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे।
प्रताड़ना से तंग आकर मीरा ने 28 फरवरी 2023 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
जमानत के मुख्य आधार:
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों और पुलिस की केस डायरी के अवलोकन के बाद निम्नलिखित बिंदु जमानत का मुख्य आधार बने:
* FIR में विलंब: घटना के संबंध में वादी द्वारा रिपोर्ट 11 दिन की देरी से दर्ज कराई गई थी, जिसका विधिक रूप से उचित स्पष्टीकरण नहीं मिल सका।
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* विवेचक की रिपोर्ट: पुलिस विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि मृतका मीरा ने स्वयं को कमरे में बंद कर आत्महत्या की थी। घटना के तुरंत बाद उसके पति ने ही दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल ले गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
* बचाव पक्ष का तर्क: बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों ने मृतका को बचाने का प्रयास किया था और उन्हें रंजिशन इस मामले में घसीटा गया है।
न्यायालय का आदेश:
जिला जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी पति भगवान सिंह उर्फ अनूप सिंह और जेठ सूरज उर्फ मोहन बहादुर का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया और उन्हें संबंधित शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।
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